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अस्‍सी और नब्‍बे के दशक में बॉलीवुड के पॉपुलर एक्‍टर रहे सुरेश ओबेरॉय ने साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्‍यता ली थी। विवेक ओबेरॉय के पिता सुरेश ने अब एक इंटरव्‍यू में अपने राजनीतिक अनुभव पर दो टूक बात रखी है। रणबीर कपूर की ‘एनिमल’ में नजर आए दिग्‍गज एक्‍टर ने राजनीतिक पार्टी से निराशा जाहिर की है और कहा है कि वह यह समझ चुके हैं कि ‘राजनीति की दुनिया मेरे लिए नहीं बनी है।’ सुरेश ओबेरॉय ने यह भी कहा कि बीजेपी में अध‍िकतर लोग सिर्फ पैसा बना रहे थे, वो भी झूठ बोलकर।

निधि वसनदानी के पॉडकास्ट में 79 साल के एक्टर ने खुलासा किया कि BJP में जाना उनकी किसी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का नतीजा नहीं था, बल्‍क‍ि वह एक कॉलेज फ्रेंड के कहने पर BJP में शामिल हुए। सुरेश ओबेरॉय ने यह भी बताया कि वह RSS प्रमुख मोहन भागवत के फैन हैं। इसी इंटरव्‍यू में उन्‍होंने जंतर-मंतर पर CJP Protest की भी आलोचना की और कहा कि यह ‘गैरजरूरी’ था। उन्‍होंने 20 जुलाई की घटना पर छात्रों को ही जिम्‍मेदार माना और कहा- छात्रों को पुलिस को नहीं पीटना चाहिए था, यह बेहूदगी थी।

हैदराबाद के दोस्‍त ने दी थी BJP में शाम‍िल होने की सलाह

मॉडलिंग से फिलमों में आए सुरेश ओबेरॉय ने कहा, ‘हैदराबाद में कॉलेज के समय का मेरा एक दोस्त था। एक दिन वह मेरे घर आया और मुझसे BJP में शामिल होने के लिए कहा। इसलिए मैं उसके साथ चला गया।’ एक्‍टर ने 2004 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले BJP की सदस्‍यता ली थी और फिर पार्टी के लिए चुनाव प्रचार भी किया था। उन्‍होंने इसकी सांस्कृतिक शाखा में भी काम किया।

सुरेश ओबेरॉय को गुरुजी ने BJP जॉइन करने पर लगाई थी डांट

बातचीत के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी से उनके जुड़ाव का कारण लालकृष्‍ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे वरिष्ठ नेताओं से संपर्क रहा। वह बोले, ‘आडवाणी जी और अटल जी ने मुझे माला पहनाई, लेकिन उसके बाद जब मैं अपने गुरु से मिला – जो मुझे बहुत प्यार करते थे – तो उन्होंने मुझे बहुत बुरी तरह डांटा। उन्होंने मुझसे कहा कि सावधान रहो, इन लोगों से कोई संपर्क मत रखो। उन्होंने कभी किसी को नहीं डांटा था, लेकिन उन्होंने मुझे सच में बहुत डांटा।’

सुरेश ओबेरॉय बोले- मैं अंदर से खुश नहीं था, मुझे अच्छी ऊर्जा नहीं मिली

एक्‍टर बताते हैं कि गुरु की चेतावनी के बावजूद वह राजनेताओं के संपर्क में रहे। लेकिन आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि वे राजनीतिक माहौल में सहज नहीं थे। सुरेश ओबेरॉय ने कहा, ‘मैं अंदर से खुश नहीं था। मुझे इससे अच्छी ऊर्जा नहीं मिली। मोदी जी और अमित शाह तो ठीक थे, लेकिन वहां के कई अन्य लोग मुझे अजीब लगे। कुछ बनावटी सा लगा। फिल्मों में, आप एक फिल्म पर काम करते हैं और फिर आगे बढ़ जाते हैं। यहां ऐसा नहीं होता। आपको चीजों को साथ लेकर चलना होता है, साथ आगे बढ़ना होता है और उसका हिस्सा बनना होता है। मैं वह हिस्सा नहीं बन सका।’

‘ज्यादातर लोग पैसे कमा रहे थे, झूठ बोलकर और पैसे बना रहे थे’

सुरेश ओबेरॉय और उनके बेटे विवेक ओबेरॉय, दोनों ही समाजसेवा में गहरी रुचि रखते हैं। दिग्‍गज एक्‍टर का कहना है कि इसी जनसेवा के आदर्शवादी विचार पर वह राजनीति में गए थे। लेकिन वहां जो अनुभव हुआ, उससे उन्हें निराशा हुई। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता था कि राजनीति का मतलब देश के लिए कुछ करना है। बाद में मुझे एहसास हुआ कि ज्यादातर लोग पैसे कमा रहे थे। झूठ बोलकर और पैसे बना रहे थे।’

सुरेश ओबेरॉय ने कहा- मोदी-योगी जैसे नेताओं को छोड़कर बाकी सब वैसे

सुरेश ओबेरॉय ने आगे यह स्‍पष्‍ट किया कि वह यहां सभी राजनेताओं के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। वह बोले, ‘दो-चार लोगों को छोड़कर – जैसे मोदी जी, उनके आस-पास के एक-दो बड़े नेता, या योगी जी – मैं उनकी बात नहीं कर रहा – लेकिन उनके अलावा ज्यादातर लोग पैसे बना रहे थे। इसलिए मुझे वे लोग पसंद नहीं आए।’

‘मैं हमेशा से मोहन भागवत का फैन रहा हूं’

सुरेश ओबेरॉय का कहना है कि वह हमेशा से मोहन भागवत के फैन रहे हैं। वह बताते हैं, ‘मैं हमेशा से मोहन भागवत जी का फैन रहा हूं। एक बार मैंने उन्‍हें अपने घर बुलाया था, लेकिन मुझे एक साल बाद की तारीख मिली। आख‍िरकार वह मेरे घर आए, जहां मेरी पत्नी ने उनके लिए हलवा बनाया था। वह बहुत खुश थे। वह मीठा नहीं खाते, इसलिए मेरी पत्नी ने कहा कि मैं हलवा बनाऊंगी। हमने उन्हें हलवा खिलाया और उन्हें वह हमेशा याद रहा।’

बेटे की फ‍िल्‍म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रील लेकर गए थे नागपुर

सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि अभी चार-पांच दिन पहले भी उनकी मोहन भागवत से फोन पर बात हुई। वह बेटे विवेक ओबेरॉय की 2019 में आई फ‍िल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ की रील भी नागपुर ले गए थे, ताकि इसे संघ प्रमुख भागवत को दिखा सकें।

2004 में कहा था- BJP में शामिल होने का फैसला मेरा अपना

सुरेश ओबेरॉय ने फरवरी 2004 में भारतीय जनता पार्टी की औपचारिक सदस्‍यता ली। तब वह नवजोत सिंह सिद्धू और गजेंद्र चौहान जैसे सेलेब्‍स के साथ पार्टी में शामिल हुए थे। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने सक्रिय रूप से पार्टी के लिए प्रचार किया। उस एक्‍टर ने कहा था कि बीजेपी में शामिल होने का फैसला उनका अपना था। अप्रैल 2004 में एक बातचीत के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने कहा था, ‘मैं खुद दिल्ली गया… और बीजेपी में शामिल होने की अपनी इच्छा जाहिर करने के लिए आडवाणी जी के पास पहुंचा।’