गॉल: गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मैच के चौथे दिन भारतीय टीम भले ही जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ा रही हो लेकिन मैदान पर घटे एक वाकये ने हेड कोच गौतम गंभीर का मूड बिगाड़ दिया। ऑलराउंडर रविंद्र जडेजा की एक नो-बॉल के कारण क्रीज पर सेट हो चुके श्रीलंकाई बल्लेबाज धनंजय डी सिल्वा को बड़ा जीवनदान मिल गया। जडेजा की गेंद पर किनारा लेकर कैच स्लिप में लपका जा चुका था लेकिन मैदानी अंपायर ने ओवरस्टेपिंग के चलते इसे नो-बॉल करार दे दिया जिसे देख ड्रेसिंग रूम में बैठे गंभीर खासे निराश नजर आए।
जडेजा की एक गलती से टीम को नहीं मिला विकेट
यह लम्हा भारतीय टीम के लिए इसलिए भी ज्यादा चुभने वाला था क्योंकि जडेजा ने अपनी फिरकी से बल्लेबाज को पूरी तरह छका दिया था। उनकी फ्लाइट होती गेंद ने तेजी से टर्न लिया और धनंजय के बल्ले का बाहरी किनारा चुमती हुई पहली स्लिप के सुरक्षित हाथों में समा गई। भारत को एक बड़ी सफलता मिल चुकी थी लेकिन अंपायर का नो-बॉल का इशारा आते ही जश्न मायूसी में बदल गया और धनंजय को जीवनदान मिल गया।
गौतम गंभीर को आया गुस्सा
गंभीर हमेशा से नो-बॉल जैसी गलतियों के सख्त खिलाफ रहे हैं। साल 2023 में जब अर्शदीप सिंह ने लगातार तीन नो-बॉल फेंकी थीं तब भी गंभीर ने कड़े शब्दों में कहा था कि इंटरनेशनल क्रिकेट में इस तरह की चूक के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। जीत के मुहाने पर खड़ी भारतीय टीम के लिए अपने मुख्य स्पिनर की ऐसी लापरवाही देखकर गंभीर का गुस्सा साफ छलक उठा।
जडेजा फेंकते हैं काफी सारी नो बॉल
दिलचस्प बात यह है कि नो-बॉल की यह समस्या जडेजा के साथ लंबे समय से जुड़ी हुई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2021 से लेकर अब तक टेस्ट क्रिकेट में जडेजा सबसे ज्यादा 84 नो-बॉल फेंकने वाले स्पिनर बन चुके हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर पाकिस्तान के नोमान अली (40) और तीसरे पर श्रीलंका के लसिथ एम्बुलडेनिया (33) मौजूद हैं। हालांकि इस मैच में जडेजा ने पहली पारी में 3 विकेट झटकने के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने 350 विकेट भी पूरे किए।
टीम इंडिया के हाथ में है मैच
बात मुकाबले की करें तो भारत ने श्रीलंका के सामने 372 रनों का विशाल लक्ष्य रखा है। पहली पारी में 178 रनों की बढ़त हासिल करने के बाद भारतीय टीम दूसरी पारी में 193 रनों पर ऑलआउट हो गई थी। जवाब में चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने 84 रनों पर अपने 4 अहम विकेट गंवा दिए हैं। मोहम्मद सिराज ने निशान मदुष्का, मानव सुतार ने पासिंदु सूर्यबंदरा और लाहिरू उदारा, जबकि प्रसिद्ध कृष्णा ने कमिंदु मेंडिस को पवेलियन का रास्ता दिखाया।



