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यरुशलम: फिलिस्तीनी अथॉरिटी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया है। भारत और फिलिस्तीन के अधिकारियों के बीच कई राजनयिक बैठकों के बाद भारत में फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने मंगलवार को नई दिल्ली में फिलिस्तीनी दूतावास में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। इसके बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या अरब देश भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करेंगे?

आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी पर अरब देशों का रुख मिला जुला और कूटनीतिक रूप से दुविधापूर्ण रहा है। फिलिस्तीन जैसे कुछ अरब देशों ने खुलकर भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है लेकिन अन्य खाड़ी और अरब देश खुलकर सामने नहीं आए हैं। उन्होंने सामान्य तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुधारों को लेकर भारत की जो मांग रही है उसका तो समर्थन किया है लेकिन भारत स्थायी सदस्यता को लेकर ठोक सामूहिक समर्थन नहीं दिया है।ॉ

UNSC में भारत की सदस्यता को लेकर अरब देशों का रूख क्या?

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे प्रमुख खाड़ी देशों के साथ भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध बेहद मजबूत हैं। ये देश वैश्विक मंचों पर भारत के साथ कई मुद्दों पर सहयोग करते हैं लेकिन इन्होंने सीधे तौर पर स्थायी सदस्यता के लिए औपचारिक या मुखर रूप से वीटो पॉवर के साथ समर्थन की घोषणा नहीं की है। इसके पीछे की वजह की बात करें तो कई अरब देश इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का हिस्सा हैं।

ओआईसी में कुल 57 मुस्लिम देश हैं और इसके सदस्य मुख्य रूप से मध्य पूर्व, उत्तरी और उप-सहारा अफ्रीका, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में फैले हुए हैं। इसीलिए मुस्लिम देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी हो जाता है।पाकिस्तान अक्सर ओआईसी के मंचों का इस्तेमाल करके भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करता है। जिससे कुछ अरब देश कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाते हैं। ज्यादातर अरब देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों और विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व के पक्ष में हैं लेकिन अंतर-सरकारी वार्ताओं में यह मुद्दा अभी भी जटिल बना हुआ है।

फिलीस्तीन की लगातार मदद करता रहा है भारत

आपको बता दें कि भारत के फिलिस्तीनियों के साथ लंबे समय से राजनीतिक और विकास संबंधी संबंध रहे हैं। नई दिल्ली ने 1970 के दशक में ‘फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन’ और 1988 में ‘फिलिस्तीन राज्य’ को मान्यता दी थी और फिलिस्तीनी अथॉरिटी को विकास और बजट से जुड़ी मदद भी दी है। भारत जेनिन में एक अस्पताल बनाने का काम भी पूरा कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में अपनी यात्रा के दौरान किया था।

इजरायल को हथियारों की सप्लाई करता है भारत

पिछले दिनों भी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत पर आरोप लगाया था कि वो लगातार इजरायल को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। पिछले दशक में भारत और इजरायल के संबंध काफी मजबूत हुए हैं। मोदी के कार्यकाल में नई दिल्ली और यरूशलेम ने रक्षा, टेक्नोलॉजी, खेती, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। मोदी सरकार ने इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी को गहरा करते हुए फिलिस्तीनियों के प्रति अपना समर्थन भी बनाए रखने की कोशिश की है। भारत सरकार ने एक बार फिर से फिलीस्तीन और इजरायल को लेकर अपनी दशकों पुरानी ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ का समर्थन किया है।