तेल अवीव/नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगता है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बताए आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलने का मन बना चुके हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका के ऊपर से निर्भरता खत्म करने का ऐलान किया है। इजरायली पीएम ने कहा ‘मैं अमेरिकी मदद बंद करना चाहता हूं। यह एक तरह की खैरात या वेलफेयर जैसी है मुझे यह नहीं चाहिए। मैं चाहता हूं कि यह प्रक्रिया इसी साल शुरू हो जाए।’
ये बिल्कुल आत्मनिर्भर भारत से मेल खाता है जिसके तहत भारत विदेशों पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। भारत मेक इन इंडिया को तेजी से आगे बढ़ा रहा है। दरअसल आज के वैश्विक अनिश्चितता के दौर में कोई भी देश किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना चाहता। जिस तरह भारत ने रक्षा और तकनीक में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया है ठीक वैसे ही इजरायल जो सालों से अमेरिकी फंडिंग पर निर्भर था वो अब अपनी स्वतंत्र पहचान और रक्षा उत्पादन नेटवर्क बनाना चाहता है।
अमेरिकी मदद को लेकर क्या बोले बेंजामिन नेतन्याहू?
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा ‘हमारी प्रति व्यक्ति GDP 67,000 डॉलर है। हम जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं। हमारी अर्थव्यवस्था अब छोटी नहीं रही… अमेरिका से मिलने वाली GDP के एक छोटे से हिस्से के लिए हम खुद ही फंड का इंतजाम कर सकते हैं। मैं अमेरिकी मदद बंद करना चाहता हूं। यह एक तरह की खैरात या वेलफेयर जैसी है। मुझे यह नहीं चाहिए। मैं चाहता हूं कि यह प्रक्रिया इसी साल शुरू हो जाए।’
भारत की तरह ‘आत्मनिर्भरता’ के रास्ते पर चलेगा इजरायल
इजरायली पीएम का ये बयान उस वक्त आया है जब डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान युद्ध पर उनका मनमुटाव काफी बढ़ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार नेतन्याहू की सार्वजनिक आलोचना कर दी है और यहां तक कहा कि नेतन्याहू वही करते हैं जो वो कहते हैं। इससे पहले भी इजरायली प्रधानमंत्री ने अमेरिकी सैन्य सहायता को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने और इजरायल को आत्मनिर्भर बनाने की बात अमेरिकी समाचार नेटवर्क CBS News के प्रसिद्ध कार्यक्रम ’60 Minutes’ के दौरान की थी।
इजरायल को अमेरिका से कितनी वित्तीय मदद मिलती है?
इजरायल वर्तमान में अमेरिका से सालाना करीब 3.8 अरब डॉलर की सैन्य सहायता मिलती है। नेतन्याहू इसे खत्म कर अगले एक दशक के भीतर पूरी तरह खत्म कर आत्मनिर्भर रक्षा नेटवर्क खड़ा करना चाहते हैं। यानि जिस तरह भारत ने रक्षा और तकनीक में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दिया है ठीक वैसे ही इजरायली पीएम भी चाहते हैं। लेकिन इजरायल के लिए ऐसा करना आसान नहीं है।
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका ने आपातकालीन पैकेजों के जरिए इजरायल को 16 अरब डॉलर से 22 अरब डॉलर से ज्यादा की अतिरिक्त सैन्य मदद पहुंचाई है। इसीलिए सैद्धांतिक रूप से इजरायल दावा कर सकता है कि वो अमेरिकी खैरात के बिना जिंदा रह सकता है लेकिन व्यावहारिक तौर पर अमेरिकी वैशाखी से उतरना बहुत मुश्किल है।
अमेरिकी मदद पर कितना निर्भर है इजरायल



