नई दिल्ली: टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के बाद पहली बार मैदान पर उतरी भारतीय क्रिकेट टीम को आयरलैंड के खिलाफ अपने पहले ही मुकाबले में 34 रनों की ऐतिहासिक और करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। नए कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुवाई में टीम इंडिया का यह आगाज बेहद निराशाजनक रहा क्योंकि टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब आयरलैंड ने भारत को मात दी है। इस करारी हार के बाद जहां एक तरफ प्लेइंग इलेवन में बदलाव की मांग तेज हो गई है वहीं दूसरी तरफ 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को बेंच पर बिठाए रखने के फैसले को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच काफी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
सीधा टीम में मौका देना जरूरी नहीं था
इस मुकाबले में टीम मैनेजमेंट ने खिताब जीतने वाली अपनी अनुभवी ओपनिंग जोड़ी संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा पर ही भरोसा बनाए रखा जिसके कारण सूर्यवंशी को अपने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ा। एक वर्ग का मानना था कि इस युवा खिलाड़ी को सीधे मौका दिया जाना चाहिए था लेकिन भारत के दिग्गज ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने टीम मैनेजमेंट के इस फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। अश्विन का मानना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे उतारने के बजाय उसे कुछ समय बाहर बैठकर खेल की बारीकियों को समझने का मौका दिया जाना चाहिए।
उसे अभी मैदान पर पानी ले जाने दो
अपने यूट्यूब चैनल पर इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए रविचंद्रन अश्विन ने फैंस से थोड़ा धैर्य रखने और खेल को समझदारी से देखने की अपील की। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, ‘कृपया सभी लोग थोड़ी समझदारी के साथ खेल के बारे में सोचें। संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ने मिलकर ओपनिंग की है और संजू ने तो वर्ल्ड कप में भी बेहतरीन बल्लेबाजी की थी। अगर आप वैभव सूर्यवंशी को खिलाने के लिए इनमें से किसी एक को बेंच पर बैठा देते हैं तो इसे एक टीम गेम कहने का क्या मतलब रह जाएगा? मैं जानता हूं कि हम सभी वैभव को खेलते देखना चाहते हैं वह एक बेहतरीन एंटरटेनर हैं। लेकिन किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं किया जा सकता। बाहर बैठकर मैच देखने की भी अपनी एक अलग अहमियत होती है। उन्हें टीम के माहौल में ढलने दीजिए खिलाड़ियों की मदद करने दीजिए, यहां तक कि मैदान पर पानी ले जाने दीजिए। इस अनुभव से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है।’
सचिन तेंदुलकर का भी उदाहरण दिया
आर अश्विन ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए आगे कहा कि कोई भी खिलाड़ी रातों-रात महान नहीं बनता। उन्होंने कहा कि एक बार जब वैभव खेलना शुरू करेंगे तो मुमकिन है कि उन्हें कभी टीम से ड्रॉप ही न किया जाए लेकिन शुरुआती दौर में प्लेइंग इलेवन से बाहर रहने पर वह टीम के माहौल को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और उनके भीतर सहानुभूति की भावना विकसित होगी। उनका करियर बहुत लंबा और शानदार होने वाला है इसलिए फिलहाल बाहर बैठना भी टीम में उनकी एक भूमिका का हिस्सा है।



