पूर्णियाः बिहार के पूर्णिया जिले के चपई गांव में एक प्रेम विवाह इस वक्त सोशल मीडिया और खबरों की सुर्खियों में छाया हुआ है। दरअसल, यह मामला एक इंटरकास्ट मैरिज का है, जहां ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखने वाली रिया ने पासवान समाज के मिलन कुमार से शादी कर ली है।
सांकेतिक दाह संस्कार कर रिश्ता तोड़ा
इस अंतरजातीय विवाह से नाराज लड़की के परिजनों ने अनोखा और कड़ा विरोध जताते हुए अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाया, उसकी शव यात्रा निकाली, दाह-संस्कार किया और मुंडन संस्कार तक करवाया। लड़की के परिवार ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर दी कि उनकी बेटी अब उनके लिए मर चुकी है।
लड़की अपने फैसले पर अडिग
इंटरकास्ट शादी के ससुराल पहुंचीं रिया ने कहा कि वो अपने फैसले पर अडिग हैं। रिया ने यह भी साफ किया कि शादी का फैसला दोनों की रजामंदी से लिया गया है। उसने बताया कि समाज में बच्चों को अक्सर अपनी पसंद बताने का मौका नहीं मिलता और उन्हें डराया-धमकाया जाता है, जिसके कारण ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं। रिया स्नातक की छात्रा है। जातिगत भेदभाव पर विचार रखते हुए उसने कहा कि समाज में जाति जैसी कोई चीज नहीं होती, सिर्फ दो ही जातियां हैं, एक स्त्रीलिंग और दूसरी पुल्लिंग।
पति ने रिया से शादी कर खुश, कहा- समाज की परवाह नहीं
पति मिलन कुमार ने सामाजिक दबाव और विरोध को खारिज करते हुए कहा कि वे दोनों एक-दूसरे के साथ खुश हैं और समाज की परवाह किए बिना अपनी जिंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं।
बेटी और बहू दोनों सम्मान और प्यार
वहीं, मिलन के पिता दिलीप पासवान ने शुरुआत में सामाजिक दबाव और परेशानियों का जिक्र किया। लेकिन बाद में उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी कोई बेटी नहीं थी। ईश्वर की कृपा से उन्हें बहू के रूप में बेटी मिल गई है। वो रिया को बेटी और बहू दोनों का पूरा दर्जा, सम्मान और प्यार देंगे।
सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी नवविवाहित जोड़े को दी बधाई
घटनास्थल पर स्थानीय लोगों के अलावा राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी नवविवाहित जोड़े को बधाई देने पहुंचे हैं। प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर अदालती और कानूनी उलझनें पैदा होती हैं, लेकिन रिया ने जो हिम्मत और स्टैंड दिखाया है, वह जातिगत भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की दिशा में एक साहसिक कदम है।



