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फिल्ममेकर एसएस राजामौली ने मलयालम सिनेमा और उसके दिग्गज एक्टर्स फहाद फासिल और मोहनलाल की जमकर तारीफ की है। ‘डोंट ट्रबल द ट्रबल’ की टीम के साथ बातचीत के दौरान राजामौली ने फहाद की फिल्मों, उनकी एक्टिंग और किरदारों में खुद को ढालने के तरीके को लेकर अपनी राय शेयर की। उन्होंने फहाद की ‘ट्रांस’ और ‘आवेशम’ को अपनी पसंदीदा फिल्मों में बताया। साथ ही, मोहनलाल से हुई एक पुरानी बातचीत को याद करते हुए उनकी एक्टिंग फिलॉसफी के बारे में भी बताया।

एसएस राजामौली ने बताया कि उन्होंने फहाद फासिल की कई फिल्में देखी हैं और उनकी एक्टिंग से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने मलयालम सिनेमा की राइटिंग और एक्टिंग की भी तारीफ की। राजामौली ने कहा कि वह फहाद के साथ काम करके यह समझना चाहते हैं कि वह अपने किरदारों में खुद को किस तरह ढालते हैं। वहीं, मोहनलाल की एक्टिंग फिलॉसफी बताते हुए उन्होंने कहा कि एक्टर खुद को किरदार और ब्रह्मांड के हवाले कर देते हैं।

‘ट्रांस’ और ‘आवेशम’ राजामौली की पसंदीदा फिल्में

एसएस राजामौली ने बताया कि वह बहुत ज्यादा मलयालम फिल्में नहीं देखते हैं, लेकिन उन्होंने फहाद फासिल की कई फिल्में देखी हैं। उन्होंने फहाद के काम की तारीफ करते हुए उनकी दो फिल्मों का खास तौर पर जिक्र किया। राजामौली ने कहा, ‘मैं बहुत ज्यादा मलयालम फिल्में नहीं देखता। हां, मैंने फहाद की कई फिल्में देखी हैं। मुझे उनकी फिल्में पसंद हैं। ट्रांस मेरी हमेशा से पसंदीदा रही है और बेशक, आवेशम भी। मैं हमेशा उनसे कहता हूं कि मुझे उनसे नफरत करना पसंद है।’

‘जोजी’ देखने के बाद फहाद को भेजा था मैसेज

बातचीत के दौरान फहाद फासिल ने ‘जोजी’ को लेकर राजामौली का भेजा हुआ एक पुराना मैसेज भी याद किया। फहाद ने बताया कि फिल्म देखने के बाद राजामौली ने उनकी एक्टिंग को लेकर उन्हें मैसेज किया था। फहाद ने कहा, ‘मुझे याद है कि जोजी देखने के बाद आपने मुझे मैसेज किया था कि, तुम एक सांप की तरह हो। मैं इसे बंद करना चाहता हूं, लेकिन मुझे नहीं पता कि कैसे।’

मलयालम सिनेमा की राइटिंग और एक्टिंग के मुरीद हैं राजामौली

एसएस राजामौली ने मलयालम सिनेमा की विविधता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि इस इंडस्ट्री में छोटी फिल्मों से लेकर बड़ी फिल्मों तक और सामाजिक मुद्दों से लेकर एक्शन और थ्रिलर तक, अलग-अलग तरह की कहानियां देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा, ‘मेरी हमेशा से पसंदीदा फिल्मों में से एक लाल सर की दृश्यम है। बस दो दिन पहले ही मैंने ब्रो डैडी देखी। मलयालम सिनेमा जिस तरह की फिल्में बनाता है, उसे देखकर मैं हैरान रह जाता हूं। छोटी फिल्मों से लेकर बड़ी फिल्मों तक, सामाजिक मुद्दों पर बनी फिल्मों से लेकर एक्शन और थ्रिलर तक। अगर आप मुझसे पूछें कि मलयालम सिनेमा में सबसे अच्छी चीज क्या है, तो मैं कहूंगा कि यह एक्टिंग और राइटिंग है।’

फहाद के साथ काम करके उनकी एक्टिंग सीखना चाहते हैं राजामौली

राजामौली ने फहाद फासिल के काम करने के तरीके को लेकर भी अपनी उत्सुकता जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह यह देखना चाहते हैं कि फहाद किसी किरदार को निभाते समय खुद को उस किरदार में किस तरह ढालते हैं। राजामौली ने आगे कहा, ‘मैं सच में फहाद के साथ काम करना चाहता हूं ताकि यह सीख सकूं कि वे अपनी एक्टिंग में किरदार को कैसे उतारते हैं। मैं वह देखना चाहता हूं। इसीलिए मैं उनके साथ काम करना चाहता हूं।’

मोहनलाल से पूछी थी एक्टिंग की प्रोसेस

एसएस राजामौली ने हैदराबाद में मोहनलाल के साथ हुई अपनी एक मुलाकात का किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने इस दिग्गज एक्टर से उनकी एक्टिंग प्रोसेस के बारे में पूछा था। इसके जवाब में मोहनलाल ने बताया था कि वह खुद को किरदार और यूनिवर्स के हवाले कर देते हैं। राजामौली ने याद करते हुए कहा, ‘उन्होंने कहा, मैं आपको अपना राज बताता हूं। किसी भी फिल्म की शूटिंग से ठीक पहले, मैं जाकर ब्रह्मांड से बात करता हूं और कहता हूं, मुझे कुछ नहीं पता। और मैं इसे अपने शरीर के हर कण से महसूस करता हूं कि मुझे एक्टिंग के बारे में कुछ नहीं पता और न ही उस किरदार के बारे में कुछ पता है। मुझे कुछ नहीं पता। मैं तुम्हारा ही एक हिस्सा हूं। तुम ही मुझे यह सब दो। मैं इस बात पर यकीन करता हूं और ऐसा ही करता हूं, और ब्रह्मांड मुझे वह सब देता है।’

‘फाफा’ नाम से भी वाकिफ थे तेलुगु दर्शक

केरल में ‘डोंट ट्रबल द ट्रबल’ के प्री-रिलीज इवेंट के दौरान राजामौली ने फहाद फासिल की लोकप्रियता से जुड़ा एक किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि फहाद की फिल्में खास वर्ग के दर्शकों के लिए होती हैं। राजामौली ने कहा, ‘भारत में बहुत से लोगों की तरह, मलयाली लोगों के अलावा, मैं भी फहाद फासिल का बहुत बड़ा फैन हूं। मैंने OTT पर उनकी कई फिल्में देखीं; मैं एक के बाद एक फिल्में खोज रहा था। मुझे हैरानी इस बात से हुई कि मुझे हमेशा लगता था कि ये कुछ खास वर्ग की फिल्में या क्लास फिल्में होंगी। मेरी सोच यही थी।’

पत्नी की कजिन ने पूछा था- क्या आपने फाफा की फिल्में देखी हैं?

राजामौली ने बताया कि करीब पांच या छह साल पहले उनकी पत्नी की 55 वर्षीय कजिन, जो एक छोटे से शहर में रहती हैं, हैदराबाद में उनसे मिलने आई थीं। इस दौरान उन्होंने राजामौली से फहाद फासिल की फिल्मों के बारे में सवाल किया। उन्होंने पूछा, ‘क्या आपने फाफा की फिल्में देखी हैं?’ राजामौली ने कहा कि उस समय उन्हें पता भी नहीं था कि ‘फाफा’ कौन हैं। बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वह फहाद फासिल की बात कर रही थीं।

फहाद की पहुंच सिर्फ खास वर्ग तक सीमित नहीं

इस घटना के बाद राजामौली को एहसास हुआ कि फहाद फासिल की लोकप्रियता सिर्फ मलयाली दर्शकों या खास वर्ग तक सीमित नहीं थी। तेलुगु भाषी इलाकों में भी लोग उन्हें पहले से जानते थे। उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘तब मुझे एहसास हुआ कि फहाद फासिल की पहुंच सिर्फ़ खास वर्ग तक ही सीमित नहीं थी। तेलुगु भाषी इलाकों के लोग भी उन्हें पहले से ही जानते थे।’

क्या है ‘डोंट ट्रबल द ट्रबल’ की कहानी?

‘डोंट ट्रबल द ट्रबल’ फहाद फासिल की सोलो लीड रोल वाली पहली तेलुगु फिल्म है। फिल्म में वह सूरी का किरदार निभा रहे हैं, जो एक स्ट्रीट मैजिशियन और छोटे-मोटे ठग हैं। उनकी जिंदगी तब बदल जाती है, जब उनकी मुलाकात दिव्या नाम की एक लड़की से होती है। दिव्या का किरदार चाइल्ड एक्टर सारा पालेकर ने निभाया है।

शशांक येलेटी ने किया है फिल्म का डायरेक्शन

शशांक येलेटी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को उन्होंने ही लिखा है। फिल्म को शोबू यारलागड्डा, प्रसाद देविनेनी और एसएस कार्तिकेय ने अर्का मीडियावर्क्स और शोइंग बिजनेस के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। एसएस राजामौली इस फिल्म को पेश कर रहे हैं। फिल्म में सौरभ सचदेवा भी नजर आएंगे। ‘डोंट ट्रबल द ट्रबल’ 2 अक्टूबर को तेलुगु, तमिल और मलयालम भाषाओं में दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।