नई दिल्ली: वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में 406 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल कर रिकॉर्ड जीत दर्ज करने के बावजूद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर खुश नजर नहीं आए। गुवाहाटी की पिच और सपाट विकेटों के रुख पर सख्त नाराजगी जताते हुए गंभीर ने कहा कि बल्ले और गेंद के बीच बराबरी का मुकाबला होना बेहद जरूरी है।
ये क्रिकेट नहीं मजाक है- गौतम गंभीर
उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे पूरी ईमानदारी से कहना पड़े तो मुझे लगता है कि बल्ले और गेंद के बीच थोड़ा और संतुलन होना चाहिए। आप क्रिकेट की बात करते हैं, लेकिन यह क्रिकेट नहीं, यह केवल बल्लेबाजी है।’ गंभीर ने गेंदबाजों के मानसिक और करियर पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका मानना है कि ऐसी पिचों पर 400 से अधिक रन बनना ब्रॉडकास्टर्स, रिकॉर्ड्स और दर्शकों के मनोरंजन के लिए तो शानदार हो सकता है, लेकिन गेंदबाजों के दृष्टिकोण से यह बेहद अन्यायपूर्ण है।
गेंदबाजों के लिए हुआ दुख
उन्होंने कहा, ‘सोचिए अगर कोई युवा गेंदबाज ऐसी पिच पर गेंदबाजी कर रहा हो, जहां विपक्षी टीम 400 रन बना दे और फिर हम 400 रनों का पीछा करने उतरें… एक सच्चे क्रिकेट फैंस और कोच के तौर पर मुझे गेंदबाजों से सहानुभूति है। ऐसी पिचों पर गेंदबाजी करना उनके साथ नाइंसाफी है, हमें उन्हें कुछ तो ऐसा देना होगा जिसके दम पर वे मैदान में मुकाबला कर सकें।’
ऐसे तो हम गेंदबाज तैयार नहीं कर पाएंगे
ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में गेंदबाजों का बचाव करते हुए भारतीय कोच ने कहा कि अब गेंदबाजों के प्रदर्शन का आकलन उनके आंकड़ों के बजाय उनकी योजनाओं के एक्जीक्यूशन के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘आपको गेंदबाजों के प्रति थोड़ी हमदर्दी और रियायत रखनी होगी। कई बार गेंदबाजी के आंकड़े देखकर आप सख्त नहीं हो सकते क्योंकि उन्होंने उतना खराब प्रदर्शन नहीं किया होता जितना आंकड़े दिखाते हैं। मैदान में पांच फील्डर अंदर रहने, दो नई गेंदों और पावर-हिटिंग के इस दौर में गेंदबाजों के पास वैसे भी विकल्प सीमित हैं। अगर आप सिर्फ विश्लेषण देखकर उनके प्रति कड़े हो जाएंगे तो हम कभी गेंदबाज तैयार नहीं कर पाएंगे।’



