नई दिल्ली: स्पेशल NIA कोर्ट ने कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक और 6 अन्य लोगों के खिलाफ PMLA के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के जरिए पाकिस्तानी प्रतिष्ठान से विदेशी फंडिंग ली थी। आरोप है कि अपराध से 8,94,87,639 रुपये की रकम जुटाई गई और बाद में आरोपियों को मिली।
अन्य आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं। आरोप है कि आरोपी अपनी विचारधारा और अलगाववाद व देश के कानून के खिलाफ विध्वंसक गतिविधियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हवाला और अन्य आतंकवादी संगठनों से अलग-अलग तरीकों और चैनलों के जरिए फंड लेने में शामिल थे।
कौन है यासीन मलिक
यासीन मलिक जम्मू और कश्मीर का एक प्रमुख अलगाववादी नेता है। वह प्रतिबंधित संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) का अध्यक्ष रह चुका है, जो 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर घाटी में सशस्त्र उग्रवाद का नेतृत्व करने वाला पहला संगठन था। यासीन मलिक वर्तमान में नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।
मई 2022 में, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एक विशेष अदालत ने यासीन मलिक को आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और कश्मीर में आतंकवादी व अलगाववादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
यासीन मलिक पर भारतीय वायुसेना के 4 जवानों की हत्या का भी आरोप
यासीन मलिक पर जनवरी 1990 में श्रीनगर के रावलपोरा में भारतीय वायुसेना (IAF) के चार जवानों की हत्या करने का आरोप है। टाडा (TADA) अदालत में चल रहे इस मामले में चश्मदीद गवाहों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उसकी मुख्य हमलावर के रूप में पहचान की है।



