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कोयंबटूर: तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार ने मेकेदातु बांध को लेकर अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है। सरकार का कहना है कि कर्नाटक को प्रस्तावित मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वॉयर प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। तमिलनाडु के राजस्व मंत्री केऐ सेंगोत्तैयान ने कावेरी के पानी पर तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य सरकार के पक्के स्टैंड को दोहराया। मेकेदातु प्रोजेक्ट पर तमिलनाडु के विरोध को दोहराते हुए केए सेंगोत्तैयान ने ऐलान किया कि कर्नाटक को इस प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेकेदातु डैम के लिए एक भी ईंट नहीं रखी जाएगी। मुख्यमंत्री विजय इसकी इजाजत नहीं देंगे।

आधव अर्जुन ने सरकार का बचाव किया

वहीं तमिलनाडु में कावेरी नदी की मेकेदातु परियोजना पर राजनीतिक विवाद के बीच टीवीके नेता और राज्य के लोक निर्माण और खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने सरकार का बचाव किया है। उन्होंने डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर लोगों को गुमराह करने और गलत तथ्य पेश किए जाने का आरोप लगाया है। एमके स्टालिन के आरोपों पर मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि सरकार ने कावेरी के पानी में अपने उचित हिस्से की सुरक्षा के लिए लगातार कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक उपाय किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण डेल्टा किसानों के हितों की रक्षा करना, पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और कर्नाटक को उचित प्रक्रिया के बिना प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना को आगे बढ़ाने से रोकना था।

पीएम मोदी से सामने उठाया मुद्दा

आधव ने बताया कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने 27 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के दौरान व्यक्तिगत रूप से तमिलनाडु की आपत्तियां उठाई थीं। चर्चा के दौरान, मुख्यमंत्री ने केंद्र से कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के अंतिम फैसले और सुप्रीम कोर्ट के 16 फरवरी 2018 के फैसले को लागू करने का आग्रह किया, साथ ही मेकेदातु परियोजना के लिए किसी भी तरह की मंजूरी का कड़ा विरोध किया। आधव के अनुसार, जब ऐसी खबरें आईं कि कर्नाटक प्रस्तावित जलाशय के लिए भूमि पूजन करने की तैयारी कर रहा है, तो मुख्यमंत्री ने 19 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य सरकार के रुख को दोहराया। पत्र में इस बात पर जिक्र दिया गया कि सभी संबंधित राज्यों (तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी) की सहमति के बिना परियोजना को मंजूरी नहीं मिल सकती है। इस पत्र में केंद्र से जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग को उचित निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया।

आधव अर्जुन डीएमके को घेरा

डीएमके की आलोचना का जवाब देते हुए आधव ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रतिकूल घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु के हितों की प्रभावी ढंग से रक्षा करने में विफल रही थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में कानूनी कमियों के कारण कावेरी और मेकेदातु विवादों को सुलझाना और अधिक कठिन हो गया था। कावेरी मुद्दे को राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बजाय तमिलनाडु के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के जल अधिकारों की रक्षा के लिए उपलब्ध हर संवैधानिक और कानूनी रास्ते का इस्तेमाल जारी रखा जाएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि सरकार रचनात्मक आलोचना के लिए तैयार है, बशर्ते उसका उद्देश्य तमिलनाडु के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना हो।