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भोपाल। मध्य प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर फिर से कर्मचारी सरकार के रवैए से नाखुश हैं। राज्य सरकार वर्ष 2025 के उन नियमों से पदोन्नति की प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारी में है, जिनके विरोध में सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने हाई कोर्ट शरण ली थी।

दरअसल, नियम में आरक्षित वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर तो उन्हें पदोन्नति दी ही जाएगी, अनारक्षित पदों पर मेरिट के आधार पर भी एससी-एसटी वर्ग को अवसर देने का प्रविधान रखा है। जबकि, मांग यह है कि आरक्षित वर्ग अपने वर्ग में पदोन्नत हों और अनारक्षित वर्ग को उसके वर्ग में आगे बढ़ने का अवसर मिले।

2002 के नियम और हाई कोर्ट का फैसला

दरअसल, पदोन्नति नियम 2002 के आरक्षण संबंधी प्रविधान के कारण हाईकोर्ट ने 2016 में पदोन्नति नियमों को निरस्त कर दिया था। कायदे से तो उस नियम से पदोन्नत हुए अनुसूचित जाति-जनजाति के कर्मचारियों को पदावनत किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने सियासी नफा-नुकसान को देखते हुए कोई निर्णय नहीं किया। जब 2025 में नियम बनाए जा रहे थे, तब सामान्य वर्ग के कर्मचारियों ने इस बात को उठाया था कि वह गलती फिर न दोहराई जाए, जिसके कारण पदोन्नतियां लंबित नहीं।

अजाक्स की मांग और सरकार का नया प्रविधान

उधर, अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारी-कर्मचारी के प्रतिनिधि संगठन (अजाक्स) का कहना था कि 36 प्रतिशत हमें जो आरक्षण मिला हुआ है, उसका लाभ तो मिले ही साथ ही साथ मेरिट के आधार पर उसे अनारक्षित श्रेणी में भी पदोन्नति मिलनी चाहिए। पहले अनारक्षित पदों पर पदोन्नति हो और फिर आरक्षित वर्ग की। तमाम विचार-विमर्श के बाद सरकार ने जो नियम तैयार किए उनमें फिर वही प्रविधान रख दिया।

सामान्य वर्ग की आपत्ति

  • हालांकि, यह व्यवस्था बना दी कि एक बार अनारक्षित श्रेणी में यदि कोई आरक्षित वर्ग का व्यक्ति पदोन्नति हो जाता है तो फिर वह अपनी श्रेणी में नहीं लौट सकेगा और आरक्षित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। मगर इसका कोई लाभ अनारक्षित श्रेणी को फिलहाल नहीं होगा, क्योंकि पूर्व में जो अनुसूचित जाति-जनजाति के अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नत हो चुके हैं, वे सामान्य वर्ग के कर्मचारियों से एक-दो पद आगे हैं।
  • जब पदोन्नतियां होंगी तो स्वाभाविक है कि प्रथम लाभ उन्हें ही मिलेगा, तब तक सामान्य वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी सेवानिवृत्त हो जाएंगे, जो इस असमानता के विरोध की लड़ाई लंबे समय से लड़ रहे हैं।

सपाक्स ने किया आंदोलन का निर्णय

यही कारण है कि एक बार फिर प्रदेश में पदोन्नति के नियम को लेकर विरोध के स्वर उठे हैं। नए नियम से पदोन्नति की कवायद के बीच सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) की केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक रविवार को भोपाल में हुई। इसमें पदोन्नति के नियमों में आरक्षित वर्ग समूह के पदों की गणना का प्रविधान विसंगतिपूर्ण बताकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया गया।