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नई दिल्ली: भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के मजबूत स्तंभ रहे अजिंक्य रहाणे ने खेल के सभी फॉर्मेट से कुछ दिन पहले संन्यास की घोषणा कर दी। कठिन परिस्थितियों में विशेषकर विदेशी सरजमीं की तेज और स्विंग होती गेंदों के सामने टीम की रीढ़ रहे रहाणे की तकनीक का लोहा हर कोई मानता था। संन्यास का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने के बाद सबसे पहले दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने उन्हें फोन कर शुभकामनाएं दीं और अपनी निराशा भी जाहिर की। इसके अलावा विराट कोहली , रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और चेतेश्वर पुजारा जैसे दिग्गजों ने भी संदेश भेजकर उनके योगदान को सराहा।

रिटायरमेंट के बाद आया सचिन तेंदुलकर का फोन

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में रहाणे ने बताया कि संन्यास की घोषणा के तुरंत बाद सचिन तेंदुलकर का फोन आया। सचिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि रहाणे भारत के लिए और अधिक मुकाबले खेलेंगे। बातचीत का जिक्र करते हुए रहाणे ने बताया, ‘सबसे पहला फोन सचिन पाजी का आया था जिन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि मैं और लंबे समय तक खेलूंगा। मैंने उनसे कहा कि मैं बिना किसी मलाल के संन्यास ले रहा हूं और करियर को बेवजह खींचना नहीं चाहता था।’ रहाणे ने यह भी बताया कि इरफान पठान ने उन्हें फोन किया, जबकि पुजारा, विराट, रोहित और बुमराह ने मैसेज भेजे।

वीडियो रिकॉर्डिंग के समय आ गए थे आंसू

इस दिग्गज बल्लेबाज ने स्वीकार किया कि करियर के इस अंतिम फैसले को सार्वजनिक करते समय वे काफी भावुक हो गए थे और खुद को रोक नहीं पाए। रहाणे ने कहा, ‘वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद मैं बहुत रोया। परिवार के साथ संन्यास पर चर्चा करते हुए मैं भावुक तो था ही लेकिन रिकॉर्डिंग के दौरान मुझ पर इसका इतना गहरा असर पड़ेगा यह नहीं सोचा था। मुझे अहसास हुआ कि जिस खेल को मैंने बरसों से प्यार किया अब उसे दोबारा नहीं खेल पाऊंगा।’ हालांकि, उन्होंने कहा कि वे अपने फैसले से पूरी तरह संतुष्ट और शांत हैं।

टीम को नंबर 1 बनाना टारगेट था

भारतीय टीम को टेस्ट क्रिकेट के टॉप तक पहुंचाने में चेतेश्वर पुजारा और विराट कोहली के साथ बिताए लम्हों को याद करते हुए रहाणे ने अपनी साझेदारी का महत्व समझाया। उन्होंने कहा, ‘पुजारा और मैंने घरेलू क्रिकेट में एक साथ काफी खेला, जबकि विराट और मैंने भारतीय टीम के लिए खेलते हुए सबसे ज्यादा वक्त बिताया। हमारे बीच शानदार बॉन्डिंग थी और सभी का एक ही लक्ष्य था भारतीय टेस्ट टीम को टॉप पर ले जाना। साल 2015 में छठे या 7वें पायदान से सफर शुरू कर हम धीरे-धीरे दुनिया की नंबर 1 टेस्ट टीम बने। हमने एक-दूसरे से बहुत कुछ सीखा और मुश्किल दौर से गुजरकर चैंपियंस बने।’