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नई दिल्‍ली: रूस ने भारत को बड़ा भरोसा दिया है। उसने कहा है कि वह भारत को ऊर्जा और उर्वरकों की सप्लाई बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। इसमें वह किसी भी तरह की अड़चन नहीं आने देगा। इस तरह का आश्‍वासन तब दिया गया है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण रुकावटें पैदा हुई हैं।

बीते रोज सोमवार को रूस की राजधानी मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके मुख्य सहयोगियों से मुलाकात की। जयशंकर रूस की दो दिन की यात्रा पर हैं।
जयशंकर ने रूस के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव के साथ मिलकर व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की।

पुतिन के भारत आने की उम्‍मीद

ये बैठकें अहम हैं। कारण है कि 12-13 सितंबर को ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन के नई दिल्ली आने की उम्मीद है। भारत और रूस कई क्षेत्रों में अपने आर्थिक संबंधों को गहरा करने और सहयोग बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं।

अपनी शुरुआती बातचीत में जयशंकर ने बढ़ते व्यापार असंतुलन की ओर ध्यान दिलाया। यह 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।

भारत को दिया भरोसा

जयशंकर के साथ बैठक में पुतिन ने भारत को भरोसा दिलाया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण पैदा हुई रुकावटों के बावजूद भारत को ऊर्जा और उर्वरकों की सप्लाई जारी रहेगी।

सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, पुतिन ने कहा, ‘हम भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को हर तरह से पूरा करने के लिए सभी संभव कोशिश कर रहे हैं। इन सप्लाई को बढ़ा रहे हैं। आगे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं।’

आर्थिक सहयोग में काफी बढ़ोतरी

जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश और शुभकामनाएं पहुंचाईं।

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में आपसे मिलने, फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में आपका स्वागत करने और समय आने पर आपकी आपसी सुविधा के अनुसार, वार्षिक शिखर सम्मेलन करने के लिए उत्सुक हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘इसलिए, महामहिम, मुझे लगता है कि हमारे सहयोग की तस्वीर बहुत मजबूत है।’

जयशंकर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे आर्थिक सहयोग में काफी बढ़ोतरी हुई है। इनमें व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु और अन्य क्षेत्र शामिल हैं। मैं इस बारे में विस्तार से बात करना चाहूंगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि दिन में पहले हुई IRIGC-TEC बैठक में उनके आर्थिक सहयोग पर ‘अच्छी रिपोर्ट’ सामने आई थी।

5 साल में 4 गुना बढ़ा है व्‍यापार

बैठक में मौजूद शीर्ष अधिकारियों में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल थे। 27वीं IRIGC-TEC बैठक में अपनी शुरुआती बात में जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार पांच सालों में चार गुना बढ़ गया है। यह 2021-22 में लगभग 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में करीब 60 अरब डॉलर हो गया है।

हालांकि, उन्होंने व्यापार असंतुलन के काफी बढ़ने पर चिंता जताई। यह 6.6 अरब डॉलर से बढ़कर 50 अरब डॉलर से ज्‍यादा हो गया था।

उन्होंने कहा, ‘इस असंतुलन को दूर करना आज हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।’

2030 तक 100 अरब डॉलर का टारगेट

मंत्री ने कहा कि बाजार तक पहुंच, टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाने, पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने और बिजनेस-टू-बिजनेस जुड़ाव को मजबूत करने से असंतुलन को दूर करने और 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के साझा टारगेट को हासिल करने में मदद मिलेगी।

जयशंकर ने अंतर-सरकारी आयोग के कामकाज में अमल और नतीजों पर ज्‍यादा ध्यान देने का भी सुझाव दिया। उन्होंने बिजनेस के साथ मजबूत जुड़ाव की बात की। कहा कि सरकारें तो बस सही माहौल बना सकती हैं। लेकिन, बिजनेस ही हैं जो व्यापार करते हैं, निवेश करते हैं, इनोवेशन करते हैं और नौकरियां पैदा करते हैं।

उन्होंने मौकों के बारे में अपनी सोच को लगातार अपडेट करने और नई संभावनाओं को तलाशने की भी बात कही।

जयशंकर ने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय हालात पेचीदा हैं। इनसे लगातार नए विचार सामने आएंगे। हम सभी जोखिम कम करने और विविधता लाने पर ध्यान दे रहे हैं।’

वह बोले, ‘आर्थिक मांगें और टेक्नोलॉजी की जरूरतें भी इसमें जुड़ेंगी। एक बुनियादी पूरकता अभी भी पूरी तरह से नहीं तलाशी गई है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में इस क्षमता को साकार करने की दिशा में प्रगति हुई है। हमें इसे आगे बढ़ाना होगा।’

उन्होंने कहा, ‘भारत-रूस साझेदारी ने लगातार मजबूती और हालात के हिसाब से ढलने की क्षमता दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल हालात के बावजूद हमारा जुड़ाव गहरा होता गया है। यह हमारे आपसी हितों और भरोसे को दिखाता है। हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की यह पहचान हैं।’