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भोपाल, मानसून की शुरुआत के साथ ही शहर के प्रमुख नालों की प्री-मानसून सफाई के दावों की हकीकत पहली तेज बारिश में सामने आ गई। गुरुवार को करीब आधे घंटे की बारिश में एमपी नगर, अरेरा हिल्स, अरेरा कॉलोनी, चार इमली समेत कई इलाकों में पानी भर गया। नगर निगम जिन पातरा, भदभदा, शाहपुरा, अरेरा, कलियासोत, हलालपुर और बैरागढ़ इलाकों के नालों की सफाई का दावा करता है, उनके कैचमेंट क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी रही।

सात नंबर तिराहे, पांच नंबर बस स्टॉप, पंचशील नगर और लिंक रोड-3 स्थित चार इमली के पास सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। इससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालांकि बारिश थमने के कुछ देर बाद पानी उतर गया, लेकिन तेज बारिश ने शहर की जल निकासी व्यवस्था और प्री-मानसून तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। कई स्थानों पर वाहन चालकों को पानी और गड्ढों के बीच से निकलना पड़ा, जिससे जाम जैसी स्थिति भी बनी।

वार्ड-10 में बदहाली पर ‘गुमशुदा पार्षद’ के पोस्टर

पिछले दिनों तेज बारिश से छोला क्षेत्र की उड़िया बस्ती में बाढ़ जैसे हालात बन गए। इसकी मुख्य वजह नरेला और गोविंदपुरा विधानसभा के बीच अधूरा पड़ा नाला है। इसके निर्माण पर अब तक 12 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, लेकिन नरेला क्षेत्र में करीब एक किलोमीटर हिस्सा अधूरा होने से जल निकासी बाधित हो रही है।

नाला गोविंदपुरा विधानसभा के वार्ड-73 (करोंद मंडी) से शुरू होकर नरेला के वार्ड-76 स्थित उड़िया बस्ती, सुंदर नगर और शिव नगर से होते हुए भानपुर के पातरा नाले में मिलता है। गोविंदपुरा क्षेत्र में नाले के दोनों किनारे पक्के बनाए जा चुके हैं, जबकि नरेला में निर्माण अधूरा है।

इससे पानी की निकासी रुक जाती है और बस्तियों में जलभराव हो जाता है। नाले की जद में आने वाले मकानों पर लगाए गए लाल निशान लंबे समय से नहीं हटाए गए हैं, जिससे समस्या और बढ़ गई है। वहीं, जोन-16 की फाइल भी वर्षों से लंबित है।

जलभराव के बाद क्षेत्रीय विधायक एवं सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। अनियमितता और लापरवाही मिलने पर उन्होंने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।

इधर, वार्ड-10 में सड़कों के गड्ढे, कचरे के ढेर, बंद स्ट्रीट लाइट और ठप विकास कार्यों से नाराज लोगों ने गुरुवार को पार्षद सरोज के खिलाफ ‘गुमशुदा पार्षद की तलाश’ और ‘हमारे जनप्रतिनिधि सो रहे हैं’ लिखे पोस्टर लगा दिए। पोस्टर पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गए। इसके बाद भाजपा नेताओं में हलचल मच गई और विवाद बढ़ने से पहले पोस्टर हटवा दिए गए।