मुझे लगने लगा था कि भारत का अपना पहला ग्रीन-फील्ड शहर बनाने का सपना शायद ही सच हो पाए। उस समय मैं दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर विकास कॉरपोरेशन (DMIDC) का सीईओ था और मुझे भारत के औद्योगिक शहरीकरण के अगले चरण को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हर मुख्यमंत्री ने हमारे प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया था कि ऐसी परियोजना के लिए 150 वर्ग किमी जमीन तय करना बहुत जोखिम भरा और मुश्किल काम है। फिर मैं गुजरात के सीएम ऑफिस पहुंचा। तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने मेरी बात सुनी, पांच मिनट तक सोचा और फिर बोले, ‘150 वर्ग किमी तो बहुत कम है। सपना देखना है, तो बड़ा देखो।’
इसके कुछ समय बाद मैंने दो वाइब्रेंट गुजरात समिट में हिस्सा लिया और एक विकसित, गतिशील और विश्व-स्तरीय राज्य बनाने के लिए उनके जबरदस्त जुनून को देखा। वह चाहते थे कि गुजरात भारत का सबसे आधुनिक राज्य बने।
सरल और बेहतर सिस्टम
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, तो औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव के तौर पर मैं उन शुरुआती अधिकारियों में से एक था, जिन्होंने उनके सामने प्रेजेंटेशन दिया। विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत को 142वें स्थान पर देखकर वह काफी निराश हुए। उन्होंने हमसे एक ही मिशन पर ध्यान देने को कहा- भारत को अपने नागरिकों और व्यवसायों के लिए ज्यादा आसान, सरल और बेहतर बनाना।
इस तरह अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में कड़ी मेहनत का दौर शुरू हुआ। हमने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, GST पर काम किया और पुराने नियमों, कानूनों, प्रक्रियाओं व अधिनियमों को हटाने पर भी फोकस किया। आखिरकार, भारत रैंकिंग में 79 स्थान ऊपर आ गया।
टेक्नॉलजी, स्पेस में उभार
पीएम मोदी के लिए संभावनाओं की कोई सीमा नहीं। वह तकनीक की गहरी समझ रखने वाले नेताओं में से एक हैं। ऐसी नीतियां बनाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, जिससे भारतीय उद्यमी आगे बढ़ सकें। उनके नेतृत्व में भारत ने AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, जियोस्पेशियल टेक्नॉलजी, ड्रोन, रक्षा और अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्रों में बहुत सारे अवसर पैदा किए हैं। चंद्रयान-3 और आदित्य-एल1 की सफलता के साथ भारत का मजबूत निजी स्पेस इकोसिस्टम उभरा है। IndiaAI और नैशनल क्वांटम मिशन, AI व क्वांटम तकनीक में स्वदेशी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। वहीं, नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसी पहल यह सुनिश्चित करता है कि देश का विकास पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हो।
बदलाव पर यकीन
2016 तक मैं भारत के सबसे बड़े पॉलिसी थिंक टैंक, नीति आयोग का प्रमुख बन चुका था। हमारी कैबिनेट की एक बैठक के दौरान पीएम मोदी ने मुझे अलग से बुलाया और भारत के सबसे पिछड़े जिलों पर काम शुरू करने के लिए कहा। उस बातचीत से आकांक्षी जिला कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसके जरिए मैंने रियल-टाइम डेटा, मापने लायक नतीजों और युवा अफसरों की ताकत में पीएम का गहरा भरोसा देखा। उन्हें पूरा यकीन था कि इन जिलों में बदलाव लाने से पूरे भारत में बदलाव आएगा। आकांक्षी शब्द का सुझाव भी उन्होंने ही दिया था। वह चाहते थे कि इन जिलों की पहचान इस बात से हो कि वे क्या बन सकते हैं, न कि इस बात से कि उनमें किन चीजों की कमी है।
उनके साथ काम करने के दौरान मुझे जो सबसे बड़ी सीख मिली, वह भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की समीक्षाओं से मिली। नीति आयोग से हमेशा यह उम्मीद की जाती थी कि वह अपनी तैयारी पूरी रखे, अलग-अलग मंत्रालयों के प्रदर्शन की जांच करे और इन पर विस्तृत रूप से प्रस्तुति दे। प्रधानमंत्री हमेशा ध्यान से बात सुनते, जानकारी समझते और फिर आगे की कई बातों पर विचार करते। उनके सवाल सीधे मुद्दे की बात करते थे। पीएम एक असाधारण श्रोता हैं। वह बिना किसी को चुप कराए पूरे माहौल पर अपनी छाप छोड़ सकते हैं। बैठकों में अपनी बात रखने से पहले वह दूसरों के नजरिए को समझते हैं।
कल्पना से हकीकत की ओर
जब मैं नीति आयोग से जा रहा था, तो मैंने प्रधानमंत्री से मिलकर उनका आभार व्यक्त किया। इसके बजाय, उन्होंने मुझे भारत के जी-20 शेरपा की जिम्मेदारी संभालने के लिए कहा। दुनिया चिंतित स्तर पर बंटी हुई थी, भू-राजनीतिक तनाव चरम पर था और आम सहमति बनना लगभग असंभव लग रहा था। फिर भी, उन्हें पूरा भरोसा था कि भारत देशों को एक साथ ला सकता है। इसी भरोसे के साथ नई दिल्ली लीडर्स डिक्लेरेशन तैयार किया गया और सर्वसम्मति से पारित हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम करने से नेतृत्व के बारे में मेरी समझ पूरी तरह से विकसित हुई है। उनसे मैंने व्यापक दृष्टिकोण अपनाना, ध्यान से सुनना, दबाव में शांत रहना और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रगति की संभावना पर भरोसा रखना सीखा है। मैंने यह भी सीखा है कि एक नेता को उस कल्पना को साकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए, जो अभी अस्तित्व में नहीं है। फिर उस कल्पना को साकार करने के लिए राज्य, प्रशासन और राष्ट्र की पूरी शक्ति लगानी चाहिए।



