नई दिल्ली: लिवर ट्रांसप्लांट के बाद अगर मरीज दोबारा शराब पीने लगता है तो उसकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। भारत में लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों को लेकर हुई नई समीक्षा में सामने आया है कि करीब 10 फीसदी मरीज ट्रांसप्लांट के बाद दोबारा शराब पीना शुरू कर देते हैं। इससे मौत का खतरा करीब तीन गुना तक बढ़ सकता है। यह समीक्षा सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एंड पैंक्रियाटिको-बिलियरी साइंसेज के प्रोफेसर और सीनियर कंसलटेंट डॉ. आशीष कुमार और प्रवीण शर्मा ने की है।
नया लिवर मिलता है, शराब की लत नहीं जाती: करंट हेपेटोलॉजी रिपोर्ट्स में प्रकाशित इस समीक्षा का मुख्य संदेश है कि लिवर ट्रांसप्लांट से खराब अंग को बदला जा सकता है, लेकिन शराब की लत खत्म नहीं होती। इसलिए ट्रांसप्लांट के बाद मरीज का शराब से पूरी तरह दूर रहना और जरूरत पड़ने पर नशामुक्ति उपचार लेना बेहद जरूरी है। लगातार शराब पीने से नए लिवर में फैट जमा होने, सूजन और फाइब्रोसिस की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
- लिवर ट्रांसप्लांट मरीजों पर सर्वे।
- इससे मौत का खतरा 3 गुना बढ़ सकता है।
मौत सिर्फ लिवर खराब होने से नहीं
स्टडी में है कि शराब दोबारा शुरू करने के बाद बढ़ने वाली मौतों की वजह सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं होती। समीक्षा के अनुसार, लंबे समय में अतिरिक्त मौतों का बड़ा हिस्सा हृदय संबंधित बीमारियों और कैंसर जैसी वजहों से भी जुड़ा पाया गया है।
भारत में स्थिति पश्चिमी देशों से बेहतर
समीक्षा में भारत और पश्चिमी देशों के आंकड़ों में भी अंतर सामने आया है। भारत में ट्रांसप्लांट के बाद शराब दोबारा शुरू करने की रिपोर्ट की गई दर करीब 9-10% है, जबकि पश्चिमी देशों की कुछ स्टडी में यह 22-26% तक रही है। मरीज की निगरानी हो तो शराब दोबारा शुरू करने का खतरा कम किया जा सकता है।



