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नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। इस बीच अमेरिकी कांग्रेस ने एक ऐसा कानून पारित क‍िया है, जिसके तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इन घटनाक्रम और ईरान-अमेरिका में टकराव के बीच अहम अपडेट सामने आया है। एक ईरानी नौसेना का शिप करीब 6 महीने से भारत में ही रुका हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के करीब छह महीने बाद भी ये ईरानी नौसेना का जहाज IRIS लावन अपने कुछ क्रू मेंबर्स के साथ कोच्चि बंदरगाह पर ही खड़ा है। 4 मार्च को ये शिप कोच्चि पहुंचा था, उसी दिन जब श्रीलंका के पास समुद्र में अमेरिकी पनडुब्बी ने एक और ईरानी फ्रिगेट IRIS डेना को डुबो दिया था।

ऐसे भारत पहुंचा ईरानी जहाज

पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब IRIS लावन और IRIS डेना फरवरी में विशाखापत्तनम में ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू’ और ‘मिलन 2026’ मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। अभ्यास के बाद जब ये जहाज घर लौटने के लिए निकले, तो युद्ध शुरू हो गया। ईरानी नौसेना का एक तीसरा जहाज, फ्लीट सप्लाई वेसल IRIS बुशहर, 5 मार्च को श्रीलंका में रुका था।

IRIS लावन के साथ क्रू मेंबर भी मौजूद

भारत ने मानवीय आधार पर लावन को 4 मार्च को कोच्चि में रुकने की इजाजत दी थी, क्योंकि इस शिप में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी। क्रू सदस्यों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया था। अब इस ईरानी नौसेना के शिप को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पता चला है कि लावन के दो दर्जन से ज्यादा अहम क्रू मेंबर्स अभी भी जहाज के साथ कोच्चि में ही हैं।

कोचीन पोर्ट के अधिकारियों ने क्या बताया

सूत्रों के मुताबिक, अब इस जहाज की देखरेख की जिम्मेदारी कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी गई है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के सवाल का जवाब देते हुए कोचीन पोर्ट अथॉरिटी के PRO ने कहा कि भारतीय नौसेना के निर्देशों के अनुसार, हम इस समय IRIS लावन के बारे में कोई भी जानकारी बताने या शेयर करने की स्थिति में नहीं हैं। फिलहाल हम और कोई जानकारी नहीं दे सकते।

मार्च से कोच्चि में रुका है शिप

मार्च में जब IRIS लावन कोच्चि पहुंचा था, तो उस पर 183 क्रू सदस्य सवार थे। एक महीने बाद, भारत ने उन क्रू सदस्यों को वापस भेज दिया जिनकी जरूरत नहीं थी। पता चला है कि अभी भी 50 से ज्यादा क्रू सदस्य कोच्चि में हैं। 7 मार्च को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि भारत ने मानवीय आधार पर IRIS लावन को कोच्चि में रुकने की इजाजत दी थी। उन्होंने कहा कि ये जहाज वहां थे, और हमें ईरानी पक्ष से मैसेज आया कि उनमें से एक जहाज, जो उस समय हमारे समुद्री इलाके के सबसे करीब थे, हमारे बंदरगाह पर आना चाहता है।