चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गोदावरी-कावेरी लिंक प्रोजेक्ट में तेजी लाने का आग्रह किया किया है। यह परियोजना तमिलनाडु की जल सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी है और इसे राष्ट्रीय महत्व का दर्जा मिलना चाहिए। पीएम मोदी को सीएम विजय ने यह पत्र ऐसे वक्त पर लिखा है जब तमिलनाडु का कावेरी के पानी को लेकर कर्नाटक से विवाद चल रहा है। इतना ही नहीं वे मेकदातु परियोजना का भी विरोध कर रहे हैं।
तमिलनाडु के पास 30% पानी की कमी
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गोदावरी-कावेरी-गुंडार नदी जोड़ो परियोजना को लागू करने में तेजी लाने और इसे राष्ट्रीय महत्व की परियोजना घोषित करने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में उन्होंने दक्षिण भारत के लिए लंबे समय तक पीने के पानी और सिंचाई की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीधे हस्तक्षेप की मांग की। विजय ने कहा कि तमिलनाडु में सतह के पानी की स्वाभाविक कमी है और राज्य अपनी पानी की 30 प्रतिशत से ज्यादा जरूरतों के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है।
भूगर्भ जल का हो रहा है दोहन
विजय ने उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नदी लिंक राज्य में सतह के जल संसाधनों को बढ़ाने और पीने के पानी व सिंचाई की बढ़ती मांग को पूरा करने का सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक अवसर है। मुख्यमंत्री विजय ने हवाला दिया है कि भूजल संसाधनों का भी बहुत ज्यादा दोहन हुआ है, और राज्य सरकार द्वारा लगातार नियमन और संरक्षण के उपाय किए जाने के बावजूद कई इलाकों में अभी भी जरूरत से ज्यादा दोहन हो रहा है। विजय ने कहा है कि गोदावरी-कावेरी-गुंडार लिंक तमिलनाडु के सतह के जल संसाधनों को बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक अवसर है। तमिलनाडु की आबादी के लिए पीने के पानी और सिंचाई की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने के लिए यह बहुत जरूरी है।गोदावरी-कावेरी लिंक परियोजना की मौजूदा स्थिति
- गोदावरी-कावेरी लिंक परियोजना वर्तमान में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद हितधारक राज्यों के बीच आम सहमति और जल-बंटवारे के विवादों के कारण रुकी हुई है।
- केंद्र सरकार के अनुसार इसका कार्यान्वयन पूरी तरह राज्यों की सहमति पर निर्भर है। वर्तमान में छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के बीच पानी के हिस्से और रूट को लेकर गंभीर मतभेद हैं।
- कर्नाटक परियोजना में अपने लिए पानी का कोटा बढ़ाने (40-45 TMC) की मांग कर रहा है।तेलंगाना का कहना है कि यह परियोजना उसके जल अधिकारों का हनन न करे और स्थानांतरित पानी का 50% हिस्सा उसे मिले।
आंध्र प्रदेश चाहता है कि नदी जोड़ो का काम राष्ट्रीय परियोजना के तहत हो पर इसके लिए मौजूदा जल अधिकार सुरक्षित रहें।
तमिलनाडु के सूखे का दिया हवाला
विजय ने पत्र में लिखा है कि तमिलनाडु के दक्षिणी जिले, खासकर पुदुक्कोट्टई, शिवगंगा, रामनाथपुरम और विरुधुनगर, हमेशा पानी की कमी और सूखे की चपेट में रहते हैं। विजय ने कहा कि इन इलाकों में पानी की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने का सबसे टिकाऊ तरीका गोदावरी-कावेरी-वैगई-गुंडार लिंक परियोजना को लागू करना होगा, जिससे पानी की अधिकता वाले बेसिन से अतिरिक्त बाढ़ का पानी पानी की कमी वाले इलाकों में भेजा जा सकेगा।
विजय का दावा दूसरे राज्य भी होंगे लाभांवित
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि तालमेल के साथ इसे लागू करने, पक्का फंडिंग और समय पर पूरा करने के लिए केंद्र और फायदा पाने वाले राज्यों की भागीदारी वाली एक खास संस्था (स्पेशल पर्पस व्हीकल) बनाने पर विचार किया जा सकता है। विजय ने कहा है कि इसे जल्द लागू करने से तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लोगों और किसान समुदायों को फायदा होगा। विजय ने भरोसा दिलाया कि तमिलनाडु सरकार इस प्रोजेक्ट को तेजी से और सफलतापूर्वक लागू करने के लिए हर जरूरी सहयोग देगी।



