भोपाल। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस छात्रों की पढ़ाई आज भी पुराने और जर्जर उपकरणों के भरोसे चल रही है। खासकर एनाटॉमी जैसे सबसे जरूरी विषय के लिए कॉलेजों में आधुनिक उपकरणों की भारी कमी है।
एमबीबीएस का नया सत्र अगस्त से शुरू हो जाएगा, लेकिन राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियमों के तहत अनिवार्य 3डी मॉडल, सिमुलेटर और डिजिटल डिसेक्शन टेबल कई कॉलेजों में अभी तक नहीं पहुंचे हैं।
काॅलेजों में नहीं आधुनिक उपकरण
नतीजा यह है कि छात्र 20 साल पुराने कंकाल और चार्ट से ही पढ़ाई करने को मजबूर हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के अलावा जबलपुर, सागर, इंदौर, रीवा, रतलाम, विदिशा और ग्वालियर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यही स्थिति है।जीएमसी के द्वितीय वर्ष के छात्र आकाश तिवारी ने कहा कि क्लास में सर थ्योरी तो नए तरीके से पढ़ाते हैं, लेकिन प्रैक्टिकल के लिए हमारे पास सिर्फ पुराने कंकाल और पोस्टर हैं। डिजिटल डिसेक्शन टेबल होती तो शरीर के अंगों को 3डी में समझना आसान हो जाता। इससे सर्जरी की समझ भी बेहतर बनती।
रीवा मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने बताया कि हमारे यहां सिमुलेटर नहीं है। सिर्फ किताब और पुराने मॉडल देखकर पढ़ना पड़ता है। एनएमसी ने कहा है कि बिना आधुनिक उपकरणों के ट्रेनिंग अधूरी रहती है। रिसर्च के लिए भी सुविधाएं नहीं हैं।
अब जारी हुआ टेंडर, जल्द मिलेंगे नए उपकरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा आपूर्ति निगम यानी एमपीपीएचएससीएल ने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए आधुनिक उपकरण खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है।



