नई दिल्ली: टाटा संस देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी है। इसमें शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप 18.37% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा माइनोरिटी स्टेकहोल्डर है। ग्रुप का कहना है कि वह ₹25,500 करोड़ का बॉन्ड इश्यू लाने के लिए टाटा संस में अपनी इक्विटी का एक हिस्सा इस्तेमाल करेगा। इसकी शर्तों के मुताबिक, इश्यू के 18 महीनों के अंदर टाटा संस को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की घोषणा करनी होगी या SP ग्रुप को अपनी ओनरशिप को लेकर टाटा होल्डिंग कंपनी के साथ समझौता करना होगा।
ईटी एक रिपोर्ट के मुताबिक एसपी ग्रुप सोमवार को बॉन्ड इश्यू लाने की तैयारी में है। बैंकिंग इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि बॉन्ड की शर्तों के में ही इस बात को माना गया है कि टाटा संस की हिस्सेदारी का मॉनेटाइजेशन रिपेमेंट के केंद्र में है। आरबीआई के स्पष्टीकरण से टाटा संस की लिस्टिंग की संभावना बढ़ गई है। हालांकि इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेकिन इससे एसपी ग्रुप को कुछ राहत मिली है।
लिस्टिंग पर तकरार
आरबीआई ने हाल में अपर-लेयर एनबीएफसी के लिए एक नई परिभाषा लागू की। इसके तहत ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा एसेट वाली कंपनियों के लिए शेयरों की पब्लिक लिस्टिंग जरूरी है। इससे टाटा संस के प्राइवेट बने रहने की संभावना लगभग खत्म हो गई है। टाटा संस का एसेट बेस ₹1.75 लाख करोड़ से ज्यादा है। आरबीआई ने इसे अपर लेयर-एनबीएफसी के तौर पर क्लासिफाई किया गया था।
टाटा संस में मैज्योरिटी स्टेकहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स ने पहले एक प्रस्ताव पास किया था कि टाटा संस को अनलिस्टेड रहना चाहिए। कंपनी के दो वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने लिस्टिंग की वकालत करते हुए कहा कि इसका अच्छा नतीजा होगा। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने लिस्टिंग का कड़ा विरोध किया है।



