इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की कुर्सी खतरे में हैं। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं। एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।
मिफ्ताह इस्माइल ने हाल ही में पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की X पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं लिया। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है।
शहबाज शरीफ ने राज में पाकिस्तान बेहाल
जब उनसे शहबाज शरीफ की छुट्टी किए जाने की वजह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पिछले चार साल पाकिस्तान के इतिहास सबसे बुरे साल रहे हैं। इन चार सालों में पाकिस्तान 4 फीसदी की विकास दर भी नहीं हासिल कर सका है। गरीबी 10 साल के उच्चतम स्तर पर है। बेरोजगारी 22 साल में सबसे ज्यादा है।
सेना ने बांध दिए शहबाज के हाथ
इस्माइल ने आगे बताया कि पाकिस्तान में इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं।
शहबाज शरीफ की गिरती पॉपुलैरिटी
मिफ्ताह इस्माइल ने शहबाज शरीफ की छुट्टी होने की सबसे बड़ी वजह उनकी लोकप्रियता का न होना बताया। उन्होंने कहा कि आखिरकार सियासत में लोकप्रियता सबसे अहम है। शहबाज शरीफ, सरकार या सिस्टम के लिए कोई ऐसी पॉपुलैरिटी नहीं लेकर आ रहे हैं कि सिस्टम कहे कि इसकी लोकप्रियता अच्छी है और इसे आगे बढ़ाया जा सकता है। आखिर में सिस्टम उन्हें ज्यादा समय तक ढो नहीं सकता है।



