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मॉस्को/नई दिल्ली: भारतीय सेना T-72 टैंकों को बदलने के लिए एडवांस टैंकों की तलाश कर रही है। इस बीच दोस्त रूस ने T-14 टैंक का प्रस्ताव भारत को भेजा है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि चार साल से ज्यादा समय से चल रहे यूक्रेन युद्ध में खुद रूस ने अभी तक इस टैंक को फ्रंटलाइन फोर्स में तैनात नहीं किया है। रूस ने कुछ T-72 को जरूर फ्रंटलाइन में भेजा था लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया।

आईडीआरडब्ल्यू ने बताया है कि रूस इस टैंक को ज्यादा मॉड्यूलर और ओपन-आर्किटेक्चर डिजाइन में बदल रहा है। और अगर अगर भारतीय सेना इसे मंजूरी देती है तो इससे भारत को स्थानीय स्तर पर उत्पादन के लिए टैंक को अपनी जरूरतों के हिसाब से बदलने की सुविधा मिलेगी।

T-72 टैंकों को एडवांस बनाने क्या बदलाव कर रहा रूस?

  • रिपोर्ट के मुताबिक रूस इसके गोला-बारूद फेंकने की क्षमता को बढ़ाने और एक मीटर से ज्यादा लंबे गोला-बारूद ले जाने की काबिलियत को बेहतर बनाने की योजना बना रहा है।
  • APS सिस्टम के अलावा, टैंक में एंटी-ड्रोन जैमर और हार्ड-किल विकल्प भी लगाए जाएंगे ताकि MBT को ड्रोन हमलों से बचाया जा सके।
  • रूसी पक्ष MBT के लिए ज्यादा हॉर्सपावर वाला इंजन मिलकर विकसित करने को भी तैयार है ताकि यह भारतीय सेना की व्यापक ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर सके।

दरअसल T-14 अर्माटा टैंक को बेचने का रूस का प्रस्ताव 2021 का ही है। उस समय रूस की ‘फेडरल सर्विस फॉर मिलिट्री-टेक्निकल कोऑपरेशन’ (FSMTC) ने कहा था कि भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक के दौरान भारतीय पक्ष को अर्माटा प्लेटफॉर्म पर आधारि बख्तरबंद वाहनों के संयुक्त विकास का प्रस्ताव दिया गया था। यह प्रस्ताव सीधे तौर पर भारत की नए मुख्य युद्धक टैंक (MBT) बनाने की योजना को ध्यान में रखकर दिया गया था।

इसके अलावा पिछले साल भी रूसी कंपनी Uralvagonzavod ने भारत के ‘नेक्स्ट जेनरेशन MBT/FRCV प्रोग्राम’ के लिए ‘Make-I’ कैटेगरी जिसमें 70% तक सरकारी फंडिंग मिलती है उसके तहत एक स्थानीय T-14 का प्रस्ताव दिया था। इसमें रूस के 12N360 इंजन को भारत के अपने DATRAN-1500HP इंजन से बदलना और भारत के CVRDE के साथ सहयोग करना शामिल था।

T-14 टैंकों को बेड़े में शामिल करने से क्यों झझकती है भारतीय सेना?

  • भारतीय सेना असल में साल 2015 से ही T-14 का मूल्यांकन कर रही है। भारतीय सैन्य अधिकारियों के मन में इस टैंक को लेकर कई तरह के झिझक हैं।
  • खुद रूसी सेना ने यूक्रेन युद्ध में T-14 के बजाय अपने पुराने T-80 और T-90 टैंकों पर ज्यादा भरोसा जताया है। T-14 अभी भी बड़े पैमाने पर उत्पादन में नहीं आया है।
  • रूस ने जुलाई 2023 में कुछ T-14 टैंकों को युद्धक्षेत्र में उतारा था लेकिन जल्द ही इन्हें फ्रंटलाइन से वापस हटा लिया गया। इन्हें मुख्य रूप से सुरक्षित दूरी से अप्रत्यक्ष गोलाबारी के लिए इस्तेमाल किया गया था न कि आमने-सामने के सीधे हमलों में।
  • इसके अलावा रोस्टेक के सीईओ सर्गेई चेमेजोव के मुताबिक T-14 टैंक अत्यधिक महंगे हैं और रूसी सेना इस आधुनिक टैंक के बजाय युद्ध में ज्यादा किफायती T-90 टैंकों का उपयोग करना पसंद करती है।
  • भारतीय सेना को 1700 से ज्यादा मुख्य युद्धक टैंकों की जरूरत है। यदि T-14 का भारत में निर्माण होता भी है तो प्रति यूनिट इसकी कीमत काफी ज्यादा रहेगी।

DRDO और प्राइवेट सेक्टर से T-14 की कड़ी टक्कर

रिपोर्ट के मुताबिक इस बार रूस ने जो प्रस्ताव दिया है उसमें सरकारी रक्षा उपक्रमों यानि PSUs के साथ मिलकर यह टैंक भारतीय सेना के सामने पेश करने की तैयारी में है। हालांकि इस बार रूसी टैंक के लिए राह आसान नहीं होगी। भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारत का निजी रक्षा क्षेत्र अपने खुद के स्वदेशी डिजाइनों के साथ मैदान में उतर रहे हैं जिससे रूसी T-14 को इस रेस में कड़ी चुनौती मिलेगी।