नई दिल्ली: इस साल की अंत में अफगानिस्तान प्रीमियर लीग की शुरुआत हो रही है। टूर्नामेंट का पहला सीजन 27 दिसंबर से खेला जाना है। इसके लिए खिलाड़ियों का ड्रॉफ्ट होना है। इससे पहले इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज ओली पोप ने अपना नाम वापस ले लिया है। यूएई की मेजबानी में यह टूर्नामेंट खेला जाएगा। उससे पहले विवाद चल रहा है। इसकी वजह अफगानिस्तान में तालिबान का महिलाओं और लड़कियों के प्रति रवैया है।
रॉब की नहीं चाहते इंग्लिश खिलाड़ी लीग में खेले
ओली पोप इंग्लैंड के उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिनके इस लीग के ड्राफ्ट में शामिल होने की उम्मीद थी। वह इंग्लैंड के सेंट्रली कॉन्ट्रैक्ट वाले एकमात्र खिलाड़ी होते। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह फैसला खुद लिया है। इसके पीछे इंग्लैंड क्रिकेट के डायरेक्टर रॉब की के साथ किसी बात का सीधा असर नहीं माना जा रहा है। रॉब की ने अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि वह वहां महिलाओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जाता है, उससे सहमत नहीं हैं और खुद ऐसी लीग में खेलने नहीं जाते।
इंग्लैंड और अफगानिस्तान में नहीं होती सीरीज
2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में लौटने के बाद से इंग्लैंड और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज नहीं होते। इंग्लैंड सिर्फ आईसीसी इवेंट में ही अफगानिस्तान का सामना करती है। की ने अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ किए जा रहे व्यवहार का भी विरोध जताया। की ने कहा- मैं अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ किए गए व्यवहार से सहमत नहीं हूं। वहां जिस तरह से चीजें होती हैं, मैं उनसे सहमत नहीं हूं।
इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज डेविड मलान उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने लीग के ड्राफ्ट में अपना नाम दिया है। उनके अलावा मोईन अली, जेम्स विंस और जेम्स रेव भी हैं। मलान ने कहा कि खिलाड़ियों को अपनी निजी मान्यताओं और रोजी-रोटी कमाने के बीच मुश्किल फैसला करना पड़ा।



