दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन में हजारों लोग पहुंचे, कहीं किसी ने डिजिटल क्रांति से आंदोलन का रुख मोड़ा तो किसी ने भूखे रहकर लेकिन उन्हीं के बीच एक चेहरा ऐसा भी था जो किसी भाषण या नारे के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा के लिए दिन-रात खड़ा रहा। वो थे मोहम्मद जुनैद मलिक। उन्होंने पूरे आंदोलनके दौरान समुदायिक रसोई संभाली। कभी वह बड़े बर्तनों में खाना परोसते दिखे, कभी भूखे लोगों तक फल और बिस्कुट पहुंचाते, तो कभी भीषण गर्मी में पानी की बोतलें बांटते नजर आए। उनकी कोशिश बस इतनी थी कि धरने पर बैठे किसी व्यक्ति को भूखा या प्यासा न रहना पड़े।
आंदोलन खत्म होने के बाद हालात अचानक बदल गए। जिन जुनैद को लोग सेवा करते हुए देख रहे थे, वही बाद में अपने परिवार पर हुई पुलिस कार्रवाई के आरोपों को लेकर सुर्खियों में आ गए। आइए देखते हैं जुनैद को कैमरे के लैंस से और जानते हैं कि किस तरह वे प्रोटेस्ट का हिस्सा न होकर भी उसका अटूट हिस्सा बने रहे..
भावुक पल में छलके आंसू
समुदायिक रसोई में खाना परोसते जुनैद
फल, पानी और नाश्ता बांटते नजर आए जुनैद
पानी और बिस्कुट की भी व्यवस्था संभाली जुनैद ने
रात तक जारी रही सेवा
हर प्लेट तक पहुंचाया खाना
इस तस्वीर में जुनैद बड़े चमचे से लोगों की प्लेट में खाना परोस रहे हैं। पूरे आंदोलन में जुनैद किसी मंच या भाषण का हिस्सा नहीं बने। उनकी पहचान उस शख्स के रूप में बनी जो चुपचाप रसोई, पानी, फल और बिस्किट की व्यवस्था संभालता रहा, ताकि आंदोलन में आए लोगों को किसी चीज की कमी न हो।
हर थाली में सम्मान
जुनैद ने हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के अपने हाथों से खाना परोसा। उनके लिए यह सिर्फ भोजन बांटना नहीं, बल्कि हर प्रदर्शनकारी की गरिमा और जरूरत का सम्मान करना था।



