पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर में मिली जीत कोई अचानक मिली सफलता नहीं थी, बल्कि इसने साबित कर दिया कि अगर एक विश्वसनीय विकल्प प्रस्तुत किया जाए, तो बिहार के लोग जातिगत राजनीति से ऊपर उठने को तैयार हैं। उन्होंने शराबबंदी को एक ‘फर्जी कानून’ करार दिया और एक नियंत्रित शराब नीति की मांग की, जो इस व्यापार को कानूनी देखरेख में लाए और प्रतिबंध से जुड़े भ्रष्टाचार को कम करे।
बांकीपुर उपचुनाव के फैसले को राजनीतिक बदलाव का संकेत बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मतदाताओं को अब से जाति, धर्म, पार्टी के प्रति निष्ठा और व्यक्तिगत नेताओं से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और शासन को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘यदि लोगों के पास एक विश्वसनीय विकल्प हो, तो वे किसी पार्टी या नेता के गुलाम नहीं हैं।’
‘बिना बिहार का विकास किए विकसित भारत की बात निरर्थक’
प्रशांत किशोर ने 3 अगस्त को हुए उपचुनाव में बांकीपुर विधानसभा सीट जीतकर अपनी पहली चुनावी जीत हासिल की, जो 1995 से ये सीट भाजपा का एक अभेद्य गढ़ रही थी। ये चुनाव लंबे समय तक विधायक रहे और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद सीट खाली होने के कारण हुआ था।
विश्वसनीय विकल्प के रूप में जन सुराज का उभार बताया
बांकीपुर के विधायक के रूप में अपनी तात्कालिक प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रशांत किशोर ने वादा किया कि पात्र लाभार्थियों को बिना किसी रिश्वत या देरी के राशन कार्ड, पेंशन और अन्य अधिकार मिलेंगे। तीन महीनों में, जिन सरकारी योजनाओं के लिए लोग पात्र हैं, वे उन तक बिना किसी परेशानी, चोरी या भ्रष्टाचार के एक अधिकार के रूप में पहुंचनी चाहिए।’प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के 10,000 बेरोजगार या अर्ध-कुशल युवाओं को अगले एक वर्ष में निजी क्षेत्र में नौकरियां पाने में मदद करने के लक्ष्य की घोषणा की। यह स्वीकार करते हुए कि अधिकांश अवसर बिहार से बाहर होंगे, उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों और बड़े कॉर्पोरेट नियोक्ताओं की कमी है। उन्होंने बांकीपुर में भाजपा की हार का कारण मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति जनता के असंतोष, पार्टी के ‘अत्यधिक आत्मविश्वास’ और एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में जन सुराज के उभार को बताया।



