इस्लामाबाद: पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले से कुछ दिन पहले एक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने दो कौमी नजरिए की बात की थी। मुनीर ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें हैं और दोनों एक दूसरे से अलग हैं, इसलिए कभी साथ नहीं रह सकते। मुनीर ने यह तर्क बंटवारे की जिन्ना की थ्योरी को सही कहलाने के लिए दिया था। उन्होंने वही कहा था जो पाकिस्तान बनने के बाद उनके देश के स्कूलों में दशकों से पढ़ाया जाता रहा है।
भारत से नफरत का आलम यह रहा है कि पाकिस्तान में स्कूली छात्रों को बंटवारे के बाद से पढ़ाया जाता रहा है कि उसका इतिहास 712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम की सिंध जीत के बाद शुरू होता है। यही वजह है कि सिंधु सभ्यता के सबसे प्रमुख स्थलों हड़प्पा और मोहनजोदड़ों के पाकिस्तान में होने के बावजूद उन्हें उपेक्षित रखा गया। हालांकि, अब पाकिस्तान का प्यार इन प्राचीन स्थलों के लिए फिर से जागा है।
सिंधु सभ्यता से जुड़े मोहनजोदड़ों की खुदाई
पाकिस्तान ने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख शहर मोहन जोदड़ो में नई खुदाई शुरू की है। यह खुदाई जून 2025 में शुरू हुई। लेकिन पाकिस्तान का इस प्राचीन सभ्यता का प्रेम अचानक से नहीं हुआ है। यह सिंधु जल संधि को लेकर उसे झेलने पड़ रहे संकट के बाद हुआ है। भारत ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था, जिसके बाद से पाकिस्तान घबराया हुआ है।
सिंधु सभ्यता से प्रेम के पीछे पाकिस्तान की चाल
पाकिस्तान अब सिंधु घाटी सभ्यता की विरासत का हवाला देकर खुद को सिंधु का मुख्य उत्तराधिकारी बता रहा है। वह सिंधु घाटी सभ्यता की कहानी का इस्तेमाल भारत को चुनौती देने और सिंधु नदी प्रणाली पर अपने दावों को मजबूत करने के लिए कर रहा है। इसका ताजा सबूत पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी का बयान है, जिसमें उन्होंने मोहन जोदड़ो और सिंधु घाटी सभ्यता का हवाला देते हुए दावा किया कि पाकिस्तान सिंधु का असली संरक्षक है।
पानी के लिए भारतीय विरासत पर जोर
बिलावल ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता की वजह से पाकिस्तान का इस नदी पर रक्षक के तौर पर ऐतिहासिक अधिकार है। पाकिस्तान संधि को रोकने के भारत के फैसले की लगातार आलोचना कर रह है। बिलावल और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जैसे नेता तो भारत को युद्ध की धमकी दे रहे हैं। लेकिन सबसे अहम बदलाव अब पाकिस्तान का पुरानी विरासत की ओर लौटना है।
बिन कासिम के पहले के इतिहास पर जोर
पाकिस्तान के ऐतिहासिक नैरेटिव में अब तक मुहम्मद बिन कासिम की जीत के बाद से ही जोर दिया जाता रहा है, लेकिन हाल ही में इसने इस्लाम से पहले वाले अतीत की विरासत को उजागर करना शुरू किया है। पाकिस्तान की सरकार समर्थित डॉक्यूमेंट्री, सेमिनार और अंतरराष्ट्रीय आउटरीज प्रोग्राम सिंधु घाटी सभ्यता को पाकिस्तान की पहचान के एक मुख्य हिस्से के तौर पर पेश कर रहे हैं।
पाकिस्तान का नया नैरेटिव पड़ेगा उल्टा
पाकिस्तान से आ रहे इन संदेशों का मकसद साफ है और इनसे नैरेटिव बनाने की चाल साफ नजर आती है। पाकिस्तान 5000 साल पुरानी नदी सभ्यता का वारिस बनकर कानूनी और जल-विज्ञान से जुड़े विवाद में ऐतिहासिक, सभ्यतागत और भावनात्मक पहलू जोड़ने की कोशिश कर रहा है। लेकिन पाकिस्तान का यह दांव भी उसके दावे को उलझा देता है। सिंधु घाटी सभ्यता की कुछ सबसे मशहूर जगहें भले आज के पाकिस्तान में हैं, लेकिन इसकी ज्यादातर ज्ञात जगहें भारत में हैं। भौगोलिक नजरिए से सभ्यता का ज्यादातर हिस्सा पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत में है।



