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बीजिंग: चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कहा है कि ईरान संकट पर पहले से ही कई देशों की मौजूदगी वाले मामले में मध्यस्थता करने से भारत को कोई खास फायदा नहीं होता। विक्रम दोरईस्वामी 4 जुलाई को 14वें वर्ल्ड पीस फोरम में ‘संरक्षणवाद और वैश्विक आर्थिक शासन’ पैनल में बोलते हुए ये बातें कही हैं।

ग्लोबल फोरम पर भारत की भूमिका और ईरान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों की तुलना को भारतीय राजदूत ने सिरे से खारिज कर दिया है। इस कार्यक्रम को बीजिंग में वर्ल्ड पीस फोरम ने आयोजित किया था। इसमें ईरान संकट में पाकिस्तान की मध्यस्थता और वैश्विक संकट में भारत की भूमिका को लेकर उनसे सवाल किया गया था।

‘ईरान संकट में पाकिस्तान की तरह मध्यस्थता करने की जरूरत नहीं’

राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कार्यक्रम में कहा ‘आप जिस मध्यस्थता की बात कर रहे हैं उसके बारे में यह तय करना अलग-अलग देशों का काम है कि क्या इससे उनकी बड़ी राष्ट्रीय स्थिति में कोई मूल्य जुड़ता है। हमने अतीत में ऐसा किया है। मुझे नहीं लगता कि इस समय जब पहले से ही कई देश इसमें शामिल हैं इससे हमें किसी खास तरह का फायदा होगा।’