मूवी रिव्यू: लस्ट स्टोरीज 3
‘लस्ट स्टोरीज 3’ की कहानी
विक्रमादित्य मोटवाने निर्देशित शॉर्ट फिल्म उम्र के 40वें साल में मिड लाइफ क्राइसिस से गुजर रहीं दो पक्की सहेलियों शोना (कोंकणा सेन शर्मा) और पद्मा उर्फ पैडी (राधिका आप्टे) की है। कोरियन शोज देखने वाली इन सहेलियों की सेक्स लाइफ फुस्स है। दोनों के पतियों (क्रमश: अभिषेक बनर्जी और विजय वर्मा) को उनकी फीलिंग की कद्र नहीं है। इसलिए, शोना और पैडी संग मिलकर अपने पतियों की अदला-बदली की योजना बनाती हैं।
विशाल भारद्वाज निर्देशित आखिरी कहानी सबसे मजेदार और असरदार है। विशाल दर्शकों को 80 के दौर में हैदराबाद की गलियों में ले जाते हैं। यहां मंटो पढ़ती-पढ़ाती पीएचडी स्कॉलर सायरा (अदिति राव हैदरी) अपने हकीम शौहर डॉक्टर बदरू (सिद्धार्थ) के बिस्तर में ‘आए मियां चटपट, गए मियां झटपट’ वाले अंदाज से आजिज आकर अंतरंग कल्पनाओं के रंगीन सपनों में ऐसी खोती है कि खुद लेडी मस्तराम यानी सेक्स नॉवेल लेखिका चुलबुली बेगम बन जाती है।
‘लस्ट स्टोरीज 3’ रिव्यू
विक्रमादित्य मोटवाने अपनी कहानी में एक देसी औरत के अरमानों के साथ उसकी असुरक्षा, डर, जलन जैसे मनोभावों को भी दिखाते हैं, लेकिन उनकी यह कहानी सिर्फ एक शॉक वैल्यू यानी चौंकाने का काम करती है। पटकथा काफी उथली सी है, इसलिए कोंकणा और राधिका जैसी दमदार ऐक्ट्रेसेज के बावजूद यह न तो रिलेटेबल लगती है, न ही बड़ा प्रभाव छोड़ पाती है।
किरण राव की कहानी एक हल्की-फुल्की मजेदार टाइमपास साबित होती है। गुरफतेह सिंह पीरजादा और सना थंपी भी प्रभावित करते हैं।
विशाल भारद्वाज ने ‘लस्ट स्टोरीज’ की थीम को अपनी कहानी, उसके माहौल से हर तरह से जस्टिफाई करते हैं। साथ ही हल्के-फुल्के टोन में औरतों और उसकी जिस्मानी जरूरतों को प्रगतिशील नजरिए से दिखाते हैं। एक्टिंग के मामले में भी रियल लाइफ कपल अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ की केमिस्ट्री जोरदार है। कुल मिलाकर, ‘लस्ट स्टोरीज’ नाम के इस फोर कोर्स मील का यह सबसे स्वादिष्ट व्यंजन है।



