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खराब डाइजेशन की वजह से पेट फूलना, गैस, कब्ज, भारीपन और पेट में असहजता जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। कई बार इसके पीछे केवल खान-पान ही नहीं, बल्कि कम फिजिकल एक्टिविटी और लगातार स्ट्रेस भी जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे में रोजाना की रूटीन में योग को शामिल करना पाचन तंत्र के लिए एक उपयोगी लाइफस्टाइल सपोर्ट हो सकता है। योग में शरीर की मूवमेंट, ब्रीदिंग और रिलैक्शेसन तीनों शामिल होते हैं, जो स्ट्रेस कम करने और शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि कोई एक योग से दो दिन में व्यक्ति का पाचन ठीक कर देगा, ऐसा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। कुछ लोगों को शुरुआती दिनों में पेट हल्का लगने या बाउल मूवमेंट में बदलाव महसूस हो सकता है, लेकिन लंबे समय के फायदे नियमित अभ्यास पर निर्भर करते हैं।

योग और पाचन तंत्र के बीच क्या कनेक्शन है?

हमारा पाचन तंत्र केवल पेट और आंतों तक सीमित नहीं है। ब्रेन और गट के बीच लगातार कम्यूनिकेशन होता रहता है, जिसे गट-ब्रेन एक्सिस कहा जाता है। स्ट्रेस, एंग्जायटी और इमोनशल बदलाव इस संपर्क को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ लोगों में पेट दर्द, गैस, ब्लोटिंग या बाउल हैबिट में बदलाव जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं।

एनसीबीआई के अनुसार डाइजेस्टिव हेल्थ पर उपलब्ध रिसर्च भी बताती है कि योग कुछ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कंडिशन्स में लक्षणों और क्वालिटी ऑफ लाइफ को बेहतर करने में मदद कर सकता है, लेकिन अभी उपलब्ध स्टडी में योग के प्रकार, समय और प्रतिभागी काफी अलग-अलग रहे हैं। इसलिए इसे डाइजेस्टिव डिजीज के इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि सपोर्ट लाइफस्टाइल प्रैक्टिस के रूप में देखना ज्यादा सही है।

डाइजेशन को सपोर्ट करने वाले योग कौन-से हैं?

वज्रासन

वज्रासन योग की आसान सीटिंग पोजीशन में से एक है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों के ऊपर बैठा जाता है और रीढ़ को सीधा रखा जाता है। इसे भोजन के बाद कुछ समय बैठने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि वज्रासन अकेले पाचन को तुरंत तेज कर देता है। इसके संभावित फायदे मुख्य रूप से आराम से बैठने, शरीर को शांत करने और हल्की फिजिकल एक्टिविटी के संदर्भ में देखे जाने चाहिए।

एनसीबीआई के अनुसार वज्रासन को दूसरे आसन के साथ डाइजेस्टिव और ऑटोनोमिक आउटकम से जुड़े योग प्रोग्राम में शामिल किया गया है, लेकिन किसी एक पोज के स्वतंत्र प्रभाव का मजबूत सबूत अभी सीमित है।

कैसे करें: घुटनों के बल बैठें, पैरों को पीछे रखें और धीरे-धीरे एड़ियों पर बैठें। पीठ सीधी रखें और सामान्य सांस लें। शुरुआत में कुछ मिनट पर्याप्त हैं।

मार्जरासन-बिटिलासन (कैट काउ पोज)

Cat-Cow को आमतौर पर मार्जरासन-बिटिलासन के रूप में जाना जाता है। इसमें हाथ और घुटनों के बल आकर रीढ़ को बारी-बारी से ऊपर और नीचे की ओर मूव किया जाता है। यह पोज स्पाइन की मोबिलिटी और मूवमेंट के लिए उपयोगी है। पेट और धड़ की हल्की मूवमेंट के कारण कुछ लोगों को यह ब्लोटिंग या शरीर के भारीपन में आरामदायक लग सकता है। पेट की अकड़न को दूर करने के लिए भी यह योग फायदेमंद हो सकता है।

कैसे करें: चारों हाथ-पैरों के सहारे आएं। सांस लेते हुए छाती को आगे खोलें और पेट को हल्का नीचे करें। सांस छोड़ते हुए पीठ को ऊपर की ओर गोल करें। मूवमेंट को धीरे-धीरे दोहराएं।

पवनमुक्तासन

पवनमुक्तासन को अक्सर पेट की गैस को बाहर निकालने में मदद करने वाला आसन माना जाता है। इसमें पीठ के बल लेटकर एक या दोनों घुटनों को पेट की तरफ लाया जाता है। इस पोज में पेट और हिप एरिया पर हल्का दबाव पड़ता है। इसी वजह से योग में गैस और पेट के निचले हिस्से में असहजता को दूर करने वाला माना जाता है। पेट की गैस दूर होने से पाचन तंत्र में सुधार देखने को मिलता है।

कैसे करें: पीठ के बल लेटें और एक घुटने को मोड़कर छाती की तरफ लाएं। हाथों से घुटने को हल्के से पकड़ें। कुछ सांसों तक रुकें और फिर पैर नीचे करें। जरूरत के अनुसार दूसरे पैर से दोहराएं।

भुजंगासन

भुजंगासन यानी कोबरा पोज में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को धीरे-धीरे ऊपर उठाया जाता है। यह बैक और पेट के निचले हिस्से में खिंचाव पैदा करता है। यह पोज सीधे तौर पर डाइजेशन को “तेज” करने वाली एक्सरसाइज नहीं है। लेकिन योग रूटिन में शामिल करने से शरीर की मोबिलिटी और फिजिकल एक्टिविटी बढ़ सकती है। रेगूलर फिजिकल एक्टिविटी को बेहतर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल फंक्शन से जोड़ा गया है।

कैसे करें: पेट के बल लेटें, हथेलियां कंधों के पास रखें और सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। कंधों पर ज्यादा दबाव न डालें और कमर में दर्द होने पर पोज रोक दें।

डाइजेशन को बेहतर करने बनाने के लिए आप आप योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, कई योग सीधे रूप से पाचन से जुड़े नहीं होते हैं लेकिन योग से शरीर के सभी अंग सक्रिय होते हैं, जिसका असर आंतों की गतिशीलता पर भी पड़ता है। यदि आपको पहले से कोई रोग है तो योग ट्रेनर की सलाह के बाद ही योगासन को करना चाहिए। इसे करते समय धीमी गति से शुरू करना चाहिए और लगातार कई दिनों तक योग करने पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य में बदलाव देखने को मिलता है।