Spread the love

शिवसागर: असम के शिवसागर जिले में दिखो नदी का रौद्र रूप देखने के मिला है। इस नदी में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक पूरे गांव को महज एक घंटे के भीतर तबाह कर दिया। असम-नागालैंड सीमा से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित हिलोनी नेपाली खुटी गांव अब सिर्फ मलबे, गाद और सन्नाटे में बदल चुका है। कभी आबाद रहने वाला यह गांव अब बाढ़ की भयावह तबाही का प्रतीक बन गया है। यहां करीब 200 गोरखा परिवार पीढ़ियों से रह रहे थे।

नागालैंड की बारिश बनी तबाही की वजह

19 जुलाई को नागालैंड की पहाड़ियों में हुई भारी बारिश के बाद दिखो नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया। उस समय ग्रामीण हर साल की तरह नदी में बहकर आई लकड़ियां और जलावन इकट्ठा कर रहे थे। देखते ही देखते नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया और तेज बहाव ने घर, खेत, मवेशी और लोगों की आजीविका को अपनी चपेट में ले लिया। 38 वर्षीय बलराम शर्मा ने बताया कि शुरुआत में किसी को खतरे का अंदाजा नहीं था। अचानक पानी तेजी से बढ़ा और कुछ ही मिनटों में पूरा गांव जलमग्न हो गया। उन्होंने कहा कि लोगों को अपना सामान तक समेटने का समय नहीं मिला। उनका परिवार दो दिन तक ऊंची जगह पर फंसा रहा, जिसके बाद राहत दल ने उन्हें सुरक्षित निकाला।

कई लोगों की मौत, परिवार हुए बेघर

बलराम शर्मा के अनुसार उनके कम से कम सात पड़ोसियों की इस हादसे में जान चली गई। वहीं, 35 वर्षीय प्रकाश शर्मा ने अपनी नाव से परिवार के 14 सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन उनके 60 मवेशियों में से केवल चार ही बच पाए। उनका परिवार फिलहाल तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए है। प्रकाश शर्मा का कहना है कि गांव को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने में 30 से 40 साल तक लग सकते हैं। उनके मुताबिक ग्रामीणों ने सिर्फ घर और संपत्ति ही नहीं, बल्कि अपनी पूरी जीवनशैली और रोजी-रोटी भी खो दी है।

बाढ़ में हजारों मवेशी बहे

इस गांव की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डेयरी फार्मिंग पर आधारित थी। ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 4,000 मवेशी थे। इनमें से अधिकांश बाढ़ में बह गए। बलराम शर्मा के 23 मवेशियों में से 16 की मौत हो गई, जबकि उनके कई पड़ोसियों ने अपने पूरे पशुधन को खो दिया। गांव के परिवार दूध बेचकर हर महीने 50 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित करते थे और हर साल गायों की बिक्री से भी अच्छी कमाई होती थी। बाढ़ के बाद गांव में हर ओर रेत, पत्थर, उखड़े हुए पेड़, टूटी टिन की छतें और बांस के ढांचे बिखरे पड़े हैं। कई जगह मरे हुए जानवरों के शव सड़ रहे हैं। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैली हुई है। कभी जीवन से भरा यह गांव अब वीरान दिखाई देता है।