भोपाल। राजधानी भोपाल की विभिन्न कॉलोनियों में बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि उपभोक्ताओं की गैर-मौजूदगी में और बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित अनुमति के पुराने बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि विरोध के बावजूद कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं सुनी।उपभोक्ताओं के अनुसार स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में तीन से पांच गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई मामलों में महज सात दिन के भीतर हजारों रुपये के बिल जारी होने से लोगों में आक्रोश है।
कटारा हिल्स निवासी का आरोप
कटारा हिल्स निवासी अविनीश शर्मा ने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में घर पर स्मार्ट मीटर लगा दिया गया। बिना किसी सूचना या सहमति के हुए इस बदलाव के बाद उनका बिजली बिल पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना बढ़ गया।
सौम्या पार्कलैंड में भी शिकायतें
सौम्या पार्कलैंड निवासी उदित वीर ने बताया कि कुछ कर्मचारी बिना पूर्व सूचना उनके अपार्टमेंट पहुंचे और पुराना मीटर हटाकर नया स्मार्ट मीटर लगा गए। पहले जहां उनका मासिक बिल करीब दो हजार रुपये आता था, वहीं अब चार से पांच हजार रुपये तक पहुंच रहा है।
इसी कॉलोनी के अंबुज शुक्ला ने भी आरोप लगाया कि बिना सूचना मीटर बदले जाने के बाद उनका बिजली बिल 1,500 रुपये से बढ़कर 5,500 रुपये हो गया।
बीडीए कॉलोनी का मामला
बीडीए कॉलोनी निवासी दीपक कनाडे ने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में नया मीटर लगा दिया गया, जबकि उन्होंने पहले ही इसे लगाने से मना किया था। उनका कहना है कि पहले उनका बिजली बिल मात्र 70 रुपये था, लेकिन मीटर बदलने के सात दिन बाद उन्हें आठ हजार रुपये का बिल मिला।
उपभोक्ताओं के अधिकार
विद्युत अधिनियम, 2003 और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के उपभोक्ता अधिकार नियम, 2020 के अनुसार किसी भी परिसर में मीटर बदलने से पहले उपभोक्ता को लिखित सूचना देना आवश्यक है। यदि बिल को लेकर विवाद हो तो उपभोक्ता को शिकायत दर्ज कराने और ‘चेक मीटर’ के माध्यम से जांच कराने का अधिकार है। विवादित बिलों का निर्धारित समय सीमा में निराकरण करना बिजली कंपनी की जिम्मेदारी है।



