बीजिंग: चीन की सेना ने एक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल बनाया है जो हजारों किलोमीटर की दूरी से लड़ाकू विमानों को मार गिराने वाले हथियारों को दागने में सक्षम है। ब्लूमबर्ग ने ये जानकारी इस डेवलपमेंट की सीधी जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति के हवाले से दी है। इस व्हीकल की सबसे खास बात ये है कि ये हथियारों को हवा से हवा में मार करने के लिए लॉन्च कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक यह डेवलपमेंट चीन की उस कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने मिसाइल भंडार की भूमिकाओं का विस्तार कर रहा है।
रिपोर्ट में इस भंडार को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताया गया है जिसमें 3,150 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत और अमेरिका के लिए चीन का ये ग्लाइड व्हीकल एक बड़ा खतरा बन सकता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन के साथ संभावित संघर्ष में यह नई क्षमता अमेरिकी हवाई अभियानों के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है खासकर उन विमानों के लिए जिन्हें अग्रिम मोर्चे की लड़ाई से दूर रहकर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। जैसे अवाक्स या इंटेजिलेंस एयरक्राफ्ट।
चीन की YJ-20 ग्लाइड व्हीकल बड़ा खतरा क्यों है?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने कुछ हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में हवा से हवा में मार करने की क्षमता जोड़ी है और कई तरह की मिसाइलों में एंटी-शिप क्षमताएं शामिल की हैं। इस क्षमता की वजह से चीन एरियल टैंकर, एयरबोर्न वॉर्निंग-एंड-कंट्रोल एयरक्राफ्ट और फ्लाइंग कमांड पोस्ट जैसे विमानों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ये तमाम एयरक्राफ्ट युद्ध के समय हवा में काफी स्थिर होकर उड़ते हैं ताकि दुश्मन के खिलाफ हवाई जानकारी लड़ाकू विमानों को दे और ऐसे एयरक्राफ्ट के लिए ये व्हीकल काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
HGV मिसाइल डिफेंस को कैसे मुश्किल बनाते हैं?
आपको बता दें कि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) ऐसे वॉरहेड होते हैं जो अपने टारगेट की ओर बढ़ते हुए वायुमंडल में अपनी दिशा बदल सकते हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षमता से उनकी रेंज बढ़ सकती है और उन्हें रोकना ज्यादा मुश्किल हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी और देश के पास ऐसे हथियार नहीं हैं जिनमें HGV और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें एक साथ हों।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में अमेरिकी वायु सेना के ‘चाइना एयरोस्पेस स्टडीज़ इंस्टीट्यूट’ की इस साल की एक रिपोर्ट का जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि चीन अपनी मिसाइलों को आधुनिक बनाने की कोशिशों में ‘दुश्मन के ऑपरेशनल सिस्टम में तालमेल के साथ बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने की क्षमता’ को ज्यादा अहमियत दे रहा है। हालांकि इस नई तकनीक के साथ ऑपरेशन से जुड़ी बड़ी चुनौतियां भी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूर मौजूद विमान पर हमला करने के लिए बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल करना महंगा, मुश्किल और जोखिम भरा हो सकता है।



