भोपाल। प्रदेश के लोक अभियोजन विभाग में अगर आप नौकरी कर रहे हैं तो ड्यूटी पर रहते हुए भी नियमित एलएलबी की डिग्री ले सकते हैं। ऐसा कोई नया शासन का आदेश नहीं आया है, लेकिन अभियोजन विभाग में यही चल रहा है। सूचना का अधिकार कानून के तहत सामने आया है कि पिछले 13 वर्षों में विभाग ने अपने 162 कर्मचारियों को बाकायदा ऐसी पढ़ाई की अनुमति दी है। इसमें से कई लोग काम करते हुए ली गई ऐसी डिग्रियों के दम पर तरक्की पाकर अधिकारी बन गए।
RTI के तहत हुआ खुलासा
दरअसल भोपाल के एक अधिवक्ता शिवपूजन ने कुछ महीनों पहले लोक अभियोजन संचालनालय से सेवा के दौरान एलएलबी करने की अनुमति पाने वाले कर्मचारियों की जानकारी मांगी थी। जवाब में संचालनालय के जन सूचना अधिकारी ने जो दस्तावेज उपलब्ध कराए उसमें संख्या के साथ उनको जारी अनुमति पत्र, अध्ययन का माध्यम, संबंधित महाविद्यालयों की समय सारिणी जैसे जानकारी थी। सामने आया कि ये कर्मचारी ऐसे महाविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे थे जिनमें कक्षाएं कार्यालयीन समय में थीं।
कर्मचारियों ने या तो काम नहीं किया या नियमित कक्षाएं नहीं की
उज्जैन और जबलपुर के दो विधि महाविद्यालय ही ऐसे मिले जिनकी समय सारिणी में देर शाम तक कक्षाओं के संचालन की व्यवस्था दिखी। इन कर्मचारियों ने अध्ययन अवकाश नहीं लिया है। सवाल उठता है कि फिर कार्यालयीन काम के दौरान विभाग के कर्मचारी एलएलबी की नियमित पढ़ाई की अनुमति कैसे पा जा रहे हैं। या तो इन कर्मचारियों ने कार्यालय में काम नहीं किया, या फिर नियमित कक्षाएं नहीं की?
पदस्थापना वाले जिले से बाहर भी कर रहे थे पढ़ाई
दस्तावेजों के मुताबिक विदिशा में पदस्थ एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी का प्रवेश दूसरे जिले के महाविद्यालय में नियमित पढ़ाई के लिए हुआ है। इसी तरह रायसेन सहित कुछ अन्य जिलों के कर्मचारियों के भोपाल और दूसरे शहरों के विधि महाविद्यालयों से नियमित पढ़ाई के दस्तावेज हैं।
यह कहता है बीसीआई
एलएलबी का नियमित पाठ्यक्रम शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह और प्रति सप्ताह न्यूनतम 30 घंटे की कक्षाएं अनिवार्य।
प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षा में बैठने के लिए 70 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य।
मूट कोर्ट, प्रायोगिक प्रशिक्षण, प्रोफेशनल एथिक्स, ड्राफ्टिंग, प्लीडिंग, कन्वेन्सिंग और अनिवार्य इंटर्नशिप भी पाठ्यक्रम का हिस्सा। (बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) का लीगल एजुकेशन रूल्स, 2008)



