ढाका/अंकारा: पाकिस्तान के साथ रक्षा संबंध करना और बांग्लादेश को ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ में शामिल करने की तुर्की की कोशिश कुछ और नहीं बल्कि भारत के पड़ोस को ‘इस्लामिक रंग’ में रंगने की कोशिश है। तुर्की की इन चालों पर भारत को घबराने की नहीं बल्कि नजर रखने की जरूरत है। सेंटर फॉर जियोपॉलिटिक्स एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज की फेलो डॉ. इंद्राणी तालुकदार ने लिखा है कि भारत के लिए अंकारा के साथ रिश्तों में तेजी से गिरावट आई है।
उन्होंने लिखा है कि 2020 के बाद खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद और ग्रीस और साइप्रस जो तुर्की के पुराने दुश्मन रहे हैं उनके साथ बढ़ते रिश्तों के जरिए पूर्वी भूमध्य सागर में नई दिल्ली की बढ़ती सक्रियता के कारण तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी अरब-बांग्लादेश का यह नया रणनीतिक गठजोड़ कई तरह की चुनौतियां पेश करता है। हालांकि उनका ये कहना पूरी तरह सही नहीं है। भारत ने जरूर ग्रीस और साइप्रस से सैन्य संबंध बनाए हैं लेकिन ऐसा पाकिस्तान को तुर्की की मदद मिलने के बाद शुरू किया गया है।
बांग्लादेश को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर सकता है तुर्की?
बांग्लादेश को अगर तुर्की पाकिस्तान और सऊदी वाले सैन्य गठबंधन में शामिल करता है तो भारत को थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है। तुर्की जरूर भारत की रणनीतिक घेराबंदी करने की कोशिश करेग। लेकिन ऐसा करना उसके लिए अत्यंत मुश्किल होगा और जितने संसाधन की जरूरत उसे होगी उतना जुटाना तुर्की के लिए संभव नहीं है। उन्होंने लिखा है कि ढाका ने पारंपरिक रूप से भारत, अमेरिका और चीन जैसी बड़ी ताकतों के साथ संबंध बनाकर रणनीतिक संतुलन बनाए रखा है।
लेकिन घरेलू राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक दबाव और सुरक्षा सहयोगियों में विविधता लाने की इच्छा ने बांग्लादेश को दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है। पाकिस्तान के साथ उसके बढ़ते संबंध इसी विविधता का प्रमाण हैं। हालांकि बांग्लादेश अभी मक्का समझौते का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है लेकिन इसमें शामिल होने की उसकी इच्छा यह दर्शाती है कि वह भारत जैसे अपने करीबी और मित्र पड़ोसी देशों पर पारंपरिक निर्भरता से परे सुरक्षा सहयोग की संभावनाओं को तलाशने को तैयार है।
बांग्लादेश-तुर्की संबंध भारत के लिए कितनी चिंताजनक बात?
डॉ. इंद्राणी तालुकदार का कहना है कि भारत लंबे समय से दक्षिण एशिया को अपने प्रभाव वाला स्वाभाविक क्षेत्र मानता रहा है जिसका आधार भौगोलिक निकटता, आर्थिक और सांस्कृतिक निर्भरता और सुरक्षा संबंध हैं। तुर्की-पाकिस्तान-सऊदी अरब-बांग्लादेश का सुरक्षा गठबंधन भले ही यह ढीले ढांचे वाला हो भारत के पड़ोस में एक बाहरी और विचारधारा से प्रेरित ताकत को लाकर भारत की इस प्रधानता को चुनौती देता है। खासकर इसलिए क्योंकि अंकारा और इस्लामाबाद ने बार-बार कश्मीर और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर भारत की नीतियों की आलोचना की है।



