ओटावा: कनाडा आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या में इस साल 60 प्रतिशत की भारी कमी आई है। कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में भी तेज गिरावट देखी गई है। इस गिरावट के बारे में बताते हुए कनाडाई पीएम मार्क कार्नी ने कहा है कि उनकी सरकार ‘इमिग्रेशन पर कंट्रोल’ हासिल करते हुए एक ज्यादा टिकाऊ और भरोसेमंद इमिग्रेशन सिस्टम बना रही है। इससे आने वाले समय में ज्यादा बेहतर व्यवस्था बनेगी।
कार्नी ने कहा, ‘हमने इमिग्रेशन पर फिर से कंट्रोल हासिल कर लिया है। शरण मांगने के दावों में एक-तिहाई की कमी आई है। अस्थायी विदेशी कामगारों के आने की संख्या तकरीबन आधी हो गई है। वहीं इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के आने की संख्या में 60% की गिरावट आई है। अब हम कनाडाई मूल्यों के अनुरूप सावधानीपूर्वक एक टिकाऊ इमिग्रेशन सिस्टम बना सकते हैं।’
भारतीय छात्रों की संख्या में कमी
साल 2023 में सभी विदेशी स्टूडेंट्स में भारतीयों की हिस्सेदारी 51.6% थी। अब कनाडा में इंटरनेशनल स्टूडेंट्स में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 8.1 फीसदी रह गई है। इस गिरावट की अहम वजह कनाडाई सरकार की ओर से उठाए गए कदम हैं। इन नीतियों में स्टडी परमिट पर सख्ती, ज्यादा वित्तीय जरूरतें और पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के कड़े नियम शामिल हैं।इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए दुनिया की टॉप जगहों में से एक के तौर पर कनाडा की प्रतिष्ठा में भी कमी आई है। कनाडा की जिन यूनिवर्सिटीज में पहले भारत, चीन और दूसरे देशों से बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स आते थे, वहां एनरोलमेंट में भारी गिरावट देखी जा रही है। इन देशों के छात्र अब कनाडा की जगह दुनिया के दूसरे देशों की यूनिवर्सिटीज को तवज्जो दे रहे हैं।
क्यों कम हुई छात्रों की संख्या
इमिग्रेशन रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और अक्टूबर 2025 के बीच कनाडा आने वाले इंटरनेशनल स्टूडेंट्स की संख्या में 2024 की इसी अवधि की तुलना में 60% की गिरावट आई है। इस अवधि के दौरान कनाडा आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में 1.5 लाख से ज्यादा की कमी आई।
दूसरे ठिकाने तलाश रहे छात्र
IRCC की रिपोर्ट दावा करती है कि नई नीतियां ऐसे स्टूडेंट्स को आकर्षित करने के लिए बनाई गई हैं, जो कनाडा में पढ़ाई करने और बसने के लिए वास्तव में तैयार हैं। इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए रास्ता खुला है लेकिन यह काफी मुश्किल हो गया है। इस वजह से छात्र पढ़ाई के लिए दूसरी जगहों के बारे में विचार कर रहे हैं।
इंटरनेशनल स्टूडेंट मोबिलिटी पर नजर रखने वाली संस्था ICEF मॉनिटर के मुताबिक, कनाडा में स्टडी परमिट रिजेक्ट होने की दर 2023 में 38% से बढ़कर 2024 में 52% हो गई। भारत जैसे देशों में विदेश में पढ़ाई के लिए सोच-समझकर फाइनेंशियल प्लानिंग करनी पड़ती है। ऐसे में भारतीय परिवार अब रिस्क लेने से बच रहे हैं।



