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टॉलीवुड के दिग्‍गज एक्‍टर बाबू मोहन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। तेलुगू फिल्‍मों के मशहूर कॉमेडियन कभी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे और आंध्र प्रदेश में श्रम मंत्री रह चुके हैं। उन्‍होंने एक हालिया इंटरव्‍यू में कहा है कि उनसे जलने वाले विरोध‍ियों ने उन्‍हें ‘पान में जहर डालकर’ मारने की कोश‍िश की थी। 74 साल के एक्‍टर को फिल्म ‘मामागारु’ के लिए बेस्‍ट कॉमेडियन का नंदी पुरस्कार मिला था।

हाल ही नानी की ‘द पैराडाइज‘ में नजर आए बाबू मोहन, तेलंगाना के खम्मम ज‍िले के बीरोलू में पैदा हुए हैं। उनका पूरा नाम पल्‍ली बाबू मोहन है और वह पर्दे पर अपनी कॉम‍िक टाइम‍िंग और अलग अंदाज में डायलॉग डिलिवरी के लिए मशहूर हैं। साल 1986 में एक्‍ट‍िंग डेब्‍यू से पहले वह आंध्र प्रदेश के राजस्व विभाग में सरकारी कर्मचारी थे। अब एक इंटरव्‍यू में उन्‍होंने अपनी जिंदगी से जुड़ी डरावनी घटना का जिक्र किया। बताया कि उन्‍होंने पान खाने की अपनी पुरानी आदत कब और क्‍यों छोड़ दी।

बाबू मोहन बोले- एक दिन में 30 से ज्यादा पान खाता था

बाबू मोहन को एक समय पान चबाने की जबरदस्त लत थी। उन्‍होंने खुद बताया कि वह किसी समय एक दिन में तीस से ज्यादा पान खाते थे। उन्हें इसकी इतनी लत लगी कि वह सेट पर, सार्वजनिक कार्यक्रमों में, हर जगह पान चबाते रहते थे। यह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्‍सा बन गया था। लेकिन यही मामूली सी लगने वाली आदत एक बार उनकी जिंदगी की बड़ी मुसीबत बनने वाली थी।

‘पान में मिलाया गया जहर, पुलिस ने फोन कर बचाई जान’

बाबू मोहन ने बताया कि जैसे-जैसे फिल्मों और राजनीति में उनका करियर आगे बढ़ा, कुछ विरोधी उनसे जलने लगे और उनसे दुश्मनी पालने लगे। उनका दावा है कि ये वो लोग थे, जो उनकी बढ़ती कामयाबी को बर्दाश्त न कर पाए और जान लेने की साजिश रची। उन्होंने बताया, ‘एक बार मुझे मारने की कोश‍िश हुई। मेरे पसंदीदा पान में जहर मिलाकर दिया गया। मैं वह पान खाने भी वाला था, लेकिन तभी पुलिस ने फोन कर चेतावनी दे दी। बताया कि पान में जहर है, इसे मत खाना। उस दिन मेरी जान बच गई।’

बाबू मोहन बोले- उसके बाद पान खाने की आदत छोड़ दी

हालांकि, बाबू मोहन ने यह नहीं बताया कि इस चौंकाने वाली घटना के पीछे किसका हाथ था। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें एक जरूरी सबक सिखाया कि ग्लैमर की दुनिया में सिर्फ चकाचौंध ही नहीं, बल्कि छिपे हुए खतरे और दुश्मनी भी होती है। वह कहते हैं, ‘उस घटना के बाद मैंने पान खाने की आदत पूरी तरह छोड़ दी।’

बाबू मोहन का राजनीतिक करियर, बीजेपी में अपमान के बाद छोड़ी पार्टी

बाबू मोहन शुरू से ही एनटी रामा राव के पक्के समर्थक थे। इसी वजह से वे तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हुए। उन्होंने 1998 के लोकसभा चुनाव में अमलापुरम लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। वह पहली बार 1998 के उपचुनाव में MLA चुने गए और 1999 में मेडक जिले की अंडोले विधानसभा सीट से दोबारा जीते। इस दौरान उन्होंने एन. चंद्रबाबू नायडू की कैबिनेट में श्रम मंत्री के तौर पर काम किया। साल 2004 और 2009 के आम चुनावों में हार के बाद 2014 में उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी छोड़कर तेलंगाना राष्ट्र समिति जॉइन कर ली। वह फिर से MLA बने। बाद में 2018 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। लेकिन अक्टूबर 2023 में बीजेपी से इस्तीफा दे दिया। उन्‍होंने इसके पीछे अपमान और जान-बूझकर नजरअंदाज किए जाने का कारण बताया। दो साल पहले 2024 में उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की सदस्यता ले ली है।