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भोपाल। मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प को बड़ी पहचान मिली है। भोपाली बटुआ एवं जरी क्राफ्ट सहित प्रदेश के चार विशिष्ट उत्पादों को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्रदान किया गया है। इससे इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान भी मिलेगी।

‘जीआई मैन ऑफ इंडिया’ रजनीकांत का रहा योगदान

इस उपलब्धि में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नाबार्ड ने वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन और शिल्पकार समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया को गति दी। वहीं, मध्य प्रदेश एमएसएमई विभाग और ‘जीआई मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री रजनीकांत के तकनीकी सहयोग ने भी अहम योगदान दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने से प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी, नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और स्थानीय कारीगरों, विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार एवं आय के नए अवसर मिलेंगे।