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इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर पर पुरानी बातों को दोहराया है। पाकिस्तानी सेना ने बुधवार को बयान जारी करते हुए कहा है कि वह कश्मीर के लोगों के साथ खड़े हैं और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में इस मुद्दे को सुलझाने के पक्ष में हैं। पाकिस्तानी सेना ने ये बातें यौम-ए-इस्तेहसाल मनाते हुए कही हैं। पाकिस्तानी सेना भारत सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की तारीख (5 अगस्त) को यौम-ए-इस्तेहसाल के तौर पर मनाती है। इस मौके का इस्तेमाल भारत और कश्मीर पर आक्रामक बयानबाजी के लिए किया जाता है। इस बार भी पाकिस्तानी सेना के बयान में भारत पर जमकर आरोपों की बौछार की गई है।

पाकिस्तानी आर्मी के मीडिया विंग ने बताया है कि उनके सैन्य नेतृत्व ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के संघर्ष के प्रति समर्थन दोहराया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सशस्त्र बल कश्मीरियों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े हैं। पाकिस्तानी आर्मी का बयान ऐसे समय आया है, जब पीओके (पाकिस्तानी कब्जे का कश्मीर) में हजारों लोग सड़कों पर हैं। पीओके के लोगों पर गोलियां चला रही पाक आर्मी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए अपने प्यार का दिखावा किया है।

सेना प्रमुख ने जारी किया बयान

पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के संयुक्त बयान में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप कश्मीर विवाद को सुलझाने पर निर्भर करती है। ऐसे में दुनिया को भारत पर इस मुद्दे को लेकर दबाव डालना चाहिए।

पाकिस्तानी सेना के बयान में कहा गया है कि भारत सरकार के कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए हुए सात साल पूरे हो गए हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द करते हुए कश्मीरियों से समृद्धि और प्रगति का वादा किया था लेकिन ये पूरे नहीं हुए। पाकिस्तान के सशस्त्र बल कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के समर्थन में अडिग हैं।

पूरे क्षेत्र में रहेगी अस्थिरता

बयान में भारत पर आरोप लगाया गया कि बलपूर्वक कश्मीर की आबादी का ढांचा बदलने की कोशिश की जा रही है और बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। बयान में आगे कहा गया है किऐसे कदम, भड़काऊ बयानबाजी और आक्रामक रवैया क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाते हैं और लोगों के लिए परेशानी का सबब बनते हैं।

बयान में यह भी कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर का मुद्दा पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। इसका शांतिपूर्ण समाधान किए बिना दक्षिण एशिया में स्थायी शांति हासिल नहीं की जा सकती। हमारा मानना है कि कोई भी स्थायी समाधान कश्मीरी लोगों की इच्छाओं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों के अनुरूप होना चाहिए।