‘विकसित भारत’ बनने के भारत के संकल्प के लिए एक ऐसी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें हर स्तर और आकार के उद्यम फल-फूल सकें, चाहे उनकी शुरुआत कहीं से भी हुई हो। पिछले 12 वर्षों में हमारी सरकार ने इन अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया है। वर्ष 2017 में GST (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने से अप्रत्यक्ष कराधान के लिए एक साझा राष्ट्रीय ढांचा स्थापित हुआ। ‘नेक्स्ट-जेनरेशन का जीएसटी’ 9 वर्षों के क्रियान्वयन और करदाताओं व राज्यों के अनुभवों के आधार पर इसी प्रयास को आगे बढ़ाता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, Next-Gen GST की परिकल्पना दो परस्पर जुड़े उद्देश्यों के साथ की गई थी- कर दरों को कम व तर्कसंगत बनाना और अनुपालन को अधिक सरल बनाना। दरों में किए गए संशोधन 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुए। प्रक्रियात्मक सुधारों का अगला चरण शीघ्र ही GST परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। सम्मिलित रूप से, इन प्रयासों का उद्देश्य परिवारों को राहत देना, व्यवसायों को अधिक निश्चितता प्रदान करना और करदाताओं के लिए एक ऐसी प्रणाली सुनिश्चित करना है, जिसमें वे बिना किसी अनावश्यक कठिनाई के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
आंकड़ों में दिखती तरक्की
राज्य इस पूरी यात्रा में बराबर के साझेदार रहे हैं। वे परिषद में अपनी प्राथमिकताओं और अनुभवों को लेकर आए, निर्णयों को आकार देने में सहयोग किया और उनके क्रियान्वयन का दायित्व संभाला। मैं इस प्रतिबद्धता के लिए उनका आभार व्यक्त करती हूं। GST की प्रगति प्रत्येक सरकार के उत्तरदायित्वों का सम्मान करते हुए एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इसी तत्परता पर टिकी है।
इसके परिणाम विश्वास को सुदृढ़ करते हैं। अक्टूबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच, दर्ज की गई कर-योग्य आपूर्ति के मूल्य में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 25.8% की वृद्धि हुई। कर दरों की हल्की संरचना के साथ-साथ दर्ज आर्थिक गतिविधियों में भी व्यापक विस्तार देखा गया है। यह उस सुधार के लिए एक अत्यंत उत्साहवर्धक आधार है, जिसका उद्देश्य उद्यमों और सार्वजनिक वित्त- दोनों को संबल प्रदान करना है।
कर राहत का असर
इस विस्तार का दायरा उसके पैमाने जितना ही महत्वपूर्ण है। सभी 11 क्षेत्रक समूहों और सभी प्रमुख राज्यों में दर्ज कर-योग्य आपूर्ति में वृद्धि देखी गई। भारत जैसी विविध अर्थव्यवस्था में यह व्यापक प्रसार अत्यंत महत्वपूर्ण है। विभिन्न क्षेत्रों और भौगोलिक हिस्सों में होने वाली यह वृद्धि अधिक से अधिक व्यवसायों को विस्तार लेते बाजारों में भाग लेने का अवसर देती है, और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न मांग, निवेश व रोजगार से अधिकाधिक समुदायों को लाभान्वित करती है।
सुधार के बाद की अवधि की तुलना में उपभोक्ताओं को की गई प्रत्यक्ष बिक्री (बी2सी) में भी 26.7% की बढ़ोतरी हुई। जब कर राहत का प्रभाव कीमतों में दिखाई देता है, तो परिवारों के पास अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने या बचत करने के लिए अधिक गुंजाइश होती है। उपभोक्ता राहत और उद्यम विकास आपस में गहराई से जुड़े है- परिवारों की क्रय शक्ति व्यवसायों द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बनाए रखती है। इसका लाभ परिवार से लेकर खुदरा विक्रेता, आपूर्तिकर्ता और उत्पादक तक, सभी तक पहुंचता है।
बढ़ता GST पंजीकरण
लघु और मध्यम उद्यमों के लिए एक राष्ट्रीय बाजार तभी सार्थक होता है, जब वह उनके स्थानीय परिवेश से परे ग्राहकों तक पहुंचने का व्यावहारिक मार्ग प्रशस्त करे। द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों के व्यवसायों को स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार जारी रखते हुए ऐसे संबंध बनाने में सक्षम होना चाहिए। वहीं, इन शहरों में विस्तार करने वाले उद्यम स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं और वितरकों के लिए नए अवसर सृजित कर सकते हैं। GST का साझा ढांचा इन कड़ियों को सुदृढ़ करता है, और सरल प्रशासनिक व्यवस्था को इन्हें बनाए रखना और भी सहज बनाना होगा।
राज्यों की सुदृढ़ राजस्व स्थिति
कर वापसी (रिफंड) भी उतनी ही प्रासंगिक है। अप्रैल-सितंबर के दौरान लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये की धनराशि रिफंड के रूप में लौटाई गई। व्यवसायों के प्राप्य बकाये को वापस लौटाना एक सुव्यवस्थित कर प्रणाली का अनिवार्य अंग है। इस प्रक्रिया में अधिक निश्चितता और पूर्वानुमेयता उद्यमों को अधिक आत्मविश्वास के साथ खरीद और उत्पादन की योजना बनाने में सहायता करेगी। किसी करदाता को देय रिफंड प्राप्त होने का अनुभव प्रशासनिक दक्षता का एक प्रमुख पैमाना होता है।
राज्यों की राजस्व स्थिति भी अधिक सुदृढ़ हुई है। इस वर्ष अप्रैल-सितंबर के दौरान एकीकृत माल और सेवा कर (आईजीएसटी) निपटान में उनके हिस्से सहित राज्यों की कुल एसजीएसटी प्राप्तियों में लगभग 16% की वृद्धि हुई। ये संसाधन बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं में निवेश को गति प्रदान करते हैं, जिससे परिवारों और उद्यमों को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बेहतर परिवेश मिलता है। इस प्रकार, ये लाभ एक-दूसरे को सशक्त बनाते हैं- परिवारों को मिलने वाली राहत मांग को बढ़ावा देती है, उद्यम आर्थिक गतिविधियों को सुदृढ़ करते हैं, और सार्वजनिक राजस्व विकास को निरंतर बनाए रखने में सहायक होता है।
सुधार के लिए आधार
7 अक्टूबर को जीएसटी परिषद के समक्ष रखे जाने वाले प्रस्ताव राज्यों के साथ निरंतर विचार-विमर्श और समन्वय के माध्यम से तैयार किए गए हैं। ये प्रस्ताव अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने के उद्देश्य से पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवादों के निपटारे और इनपुट टैक्स क्रेडिट के सुगम प्रवाह से जुड़े हैं। करदाताओं का अनुभव ही इसके क्रियान्वयन का मुख्य मार्गदर्शक बना रहना चाहिए।



