भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम केवल भाजपा या कांग्रेस की हार-जीत तक सीमित नहीं हैं। यह मिशन 2028 की तैयारियों और जनता के मूड की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद यह चौथा उपचुनाव है। पहले के तीन उपचुनावों में भाजपा दो-एक से आगे चल रही है। अब दतिया उपचुनाव का परिणाम बताएगा कि किसका ग्राफ बढ़ेगा।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की पहली परीक्षा
उधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में यह पहला विधानसभा चुनाव है। उन्होंने चुनाव के दौरान दतिया में लगातार प्रवास किया और पार्टी की चुनावी गतिविधियों पर नजर रखी। इस चुनाव परिणाम को उनके संगठनात्मक नेतृत्व और चुनाव प्रबंधन की पहली बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले तीन उपचुनावों का गणित
वर्ष 2023 के बाद मध्य प्रदेश में तीन विधानसभा सीटों के उपचुनाव हुए। उसमें भाजपा दो और कांग्रेस एक सीट जीती थी। बुधनी सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विदिशा से लोकसभा चुनाव के कारण रिक्त हुई थी। यहां भाजपा के रमाकांत भार्गव चुनाव जीते।
उधर, छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव कांग्रेस से विधायक कमलेश शाह के पार्टी छोड़ने की वजह से हुआ। भाजपा ने कमलेश शाह पर दांव लगाया और उन्होंने कांग्रेस की इस परंपरागत सीट पर कमल खिलाया।
कांग्रेस के रामनिवास रावत ने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली। उन्हें वन मंत्री बनाया गया और पद पर रहते उनकी श्योपुर जिले की विजयपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ने विजय प्राप्त कर पार्टी का कब्जा बरकरार रखा।
दतिया उपचुनाव के पीछे का कारण और प्रत्याशी
कुछ ऐसी ही स्थिति दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर है। कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था, मगर आर्थिक अनियमितता से जुड़े एक मामले में न्यायालय ने उन्हें तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके कारण वह अयोग्य हो गए और उनकी सदस्यता समाप्त हो गई, जिसके कारण उपचुनाव हो रहा है। भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा के स्थान पर आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया तो कांग्रेस ने पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा।
दोनों दलों का प्रचार और कसौटी
दोनों ही दलों ने पूरी ताकत झोंकी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लेकर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार किया। मध्य प्रदेश कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेता दतिया पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह चार दिन रहे। यहां के परिणाम से प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संगठनात्मक नेतृत्व, चुनाव प्रबंधन के साथ सरकार के कामकाज को कसौटी पर कसा जाएगा तो कांग्रेस के पीढ़ी परिवर्तन, संगठन सृजन की परीक्षा भी होगी।



