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नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील जर्मनी की कंपनी मार्ट्रेड के साथ अपनी 25 साल पुरानी पार्टनरशिप खत्म करने जा रही है। दोनों कंपनियों ने 2001 में जॉइंट शिपिंग वेंचर बनाया था। अब टाटा स्टील इसमें जर्मन कंपनी की 23% हिस्सेदारी 335 करोड़ रुपये में खरीद रही है। डील पूरी होने के बाद इसमें टाटा स्टील की हिस्सेदारी 51% से बढ़कर 74% हो जाएगी जबकि जापान की NYK की 26% हिस्सेदारी बनी रहेगी।

टाटा स्टील IQ मार्ट्रेड होल्डिंग एंड मैनेजमेंट से TM इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स के 41.4 लाख इक्विटी शेयर खरीद रही है। इस ट्रांजैक्शन के साथ ही दोनों कंपनियों के बीच 26 जुलाई, 2001 को वजूद में आया जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट खत्म हो जाएगा। यह एग्रीमेंट कंपनी के बड़े विदेशी विस्तार (कोरस का अधिग्रहण) से पहले का था। यह टाटा स्टील, मार्ट्रेड और NYK का ऐसा वेंचर था जो सदी की शुरुआत से ही भारतीय कंपनी के कच्चे माल और तैयार स्टील को समुद्र के रास्ते लाने-ले जाने का काम कर रहा था।

बड़े निवेश को मंजूरी

टाटा ग्रुप की कंपनी के बोर्ड ने साथ ही नीलाचल इस्पात निगम की क्षमता को 4.8 मिलियन टन तक बढ़ाने के लिए 33,873 करोड़ रुपये के बड़े निवेश को भी मंजूरी दे दी है। ओडिशा के इस प्लांट को सरकार से प्राइवेटाइजेशन सेल के जरिए खरीदा गया था और अब इसे एक विलय प्रक्रिया के जरिए टाटा स्टील में मिलाया जा रहा है। कंपनी ने कहा कि क्षमता बढ़ने से उसके ‘लॉन्ग प्रोडक्ट्स’ पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी, क्योंकि इसके ब्रांडेड रिटेल प्रोडक्ट्स की मांग बहुत ज्यादा है।

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में टाटा स्टील का नेट प्रॉफिट 19% बढ़कर 2,385 करोड़ रुपये हो गया जबकि ऑपरेशन से होने वाला रेवेन्यू 15% बढ़कर 60,412 करोड़ रुपये रहा। जून तिमाही के दौरान कंपनी ने कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत खर्च) पर 3,579 करोड़ रुपये खर्च किए।