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नई दिल्‍ली: शिवांग चंदना दिल्ली में पले-बढ़े हैं। उन्‍होंने कॉर्पोरेट जगत के बजाय सिलाई और डिजाइनिंग की ओर कदम बढ़ाने का फैसला किया। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से पढ़ाई करने के बाद साल 2020 के लॉकडाउन के दौरान उन्‍होंने शौक में अपने ब्रांड की नींव रखी। इसका नाम ‘पास्ट मॉडर्न’ है। आज यह ब्रांड भारत की पारंपरिक शिल्प कला और मॉडर्न स्ट्रीटवियर के बीच की खाई को पाटने का काम कर रहा है। इसने अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली है। आइए, यहां शिवांग चंदना की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।

यूट्यूब से सीखी सिलाई

दिल्ली के शिवांग चंदना ने अमेरिका में अर्थशास्त्र और एप्लाइड स्टैटिस्टिक्स की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्‍होंने संयुक्त राष्ट्र (UNDP) और सिलिकॉन वैली के स्टार्टअप्स में इंटर्नशिप की। हालांकि, फिल्मी किरदारों से प्रभावित होकर फैशन के प्रति उनके मन में जागी जिज्ञासा ने आखिरकार उन्हें महामारी के दौरान यूट्यूब से सिलाई सीखने और कपड़े डिजाइन करने के लिए प्रेरित किया। जब उन्होंने खुद के बनाए कपड़े कॉलेज में पहनने शुरू किए और दोस्तों की तारीफ मिली तो उन्होंने कॉर्पोरेट की सुरक्षित दुनिया को छोड़कर अपने इसी जुनून को ही अपना करियर बनाने की ठान ली।

ऐसे आया स्‍टार्टअप का आइडिया

जयपुर, उदयपुर, ओडिशा और कश्मीर जैसे पारंपरिक शिल्प क्लस्टर का दौरा करने के वक्‍त शिवांग ने महसूस किया कि इन परिवारों की नई पीढ़ी कम आमदनी के चलते इस पुश्तैनी काम को जारी नहीं रखना चाहती है। इस चिंता ने उन्हें एक ऐसा ब्रांड बनाने के लिए प्रोत्‍साहित किया जो पारंपरिक कारीगरी को अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और आधुनिक बनाए। मकसद यह था कि कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित लाभ मिल सके। आज उनका स्‍टार्टअप सप्लाई चेन नेटवर्क भारत के 350 से ज्‍यादा शिल्पकार परिवारों को सीधे तौर पर रोजगार दे रहा है। इससे न सिर्फ उनकी कला जिंदा है बल्कि उनके जीवन में असल बदलाव भी आ रहा है।

अनन्‍या पांडे भी दीवानी

साल 2024 में मशहूर चित्रकार एस.एच. रजा की कलाकृतियों से प्रेरित अपने पहले कलेक्शन के साथ इस ब्रांड ने अपनी आधिकारिक शुरुआत की। इसे तब असली पहचान मिली जब अप्रैल 2025 में इसके हाथ से बने टैंक टॉप्स बाजार में आए। सूरजमुखी, नींबू और पपीता जैसे समर मोटिफ्स वाले इन टैंक टॉप्स को बिना किसी भारी-भरकम मार्केटिंग के ही जबरदस्त लोकप्रियता मिली। इन्‍हें अनन्या पांडे और ‘द रिबेल किड’ जैसी मशहूर हस्तियों और कंटेंट क्रिएटर्स ने भी पहना। इस तरह ब्रांड ने पारंपरिक ड्रेसेस से आगे बढ़कर युवाओं के रोजमर्रा के वार्डरोब में अपनी मजबूत जगह बना ली।

अमेरिका-ब्रिटेन में विस्‍तार

शुरुआत में खुद की पूंजी लगाकर और इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करके शिवांग ने क्‍वालिटी पर पूरा कंट्रोल रखा। उनकी यह मेहनत रंग लाई। आज ब्रांड 96,000 से अधिक ग्राहकों को अपनी सेवाएं दे चुका है। इसका रिपीट रेट शानदार 40% पर बना हुआ है। भारत की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए मार्च 2026 में अमेरिका और ब्रिटेन के बाजारों में कदम रखने वाले इस ब्रांड को न्यूयॉर्क पॉप-अप में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। यह साबित करता है कि भारतीय कारीगरी और आधुनिक फैशन का संगम बाहर के लोगों को भी खूब भा रहा है।