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सियोल: दक्षिण कोरिया K9 थंडर सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर का नेक्स्ट जेनरेशन वेरिएंट K9A2 बना रहा है। इसे हनव्हा एयरोस्पेस ने विकसित किया है। भारत इसी के पुराने वेरिएंट K9 थंडर का भारतीय संस्करण K9 वज्र- T का इस्तेमाल करता है। सोमवार को भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 300 से अधिक K9 वज्र- T सेल्फ प्रोपेल्ड हॉवित्जर खरीदने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इस डील की अनुमानित कीमत 20000 डॉलर से ज्यादा आंकी गई है। यह खरीद भारतीय सेना के आर्टिलरी मॉर्डनाइजेशन प्लान के तरह की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि भारत भी भविष्य में K9 वज्र- T को नेक्स्ट जेनरेशन वेरिएंट K9A2 में अपग्रेड कर सकता है।

K9A2 हॉवित्जर में खास क्या है?

  • नए वेरिएंट K9A2 में पूरी तरह से ऑटोमेटिक गोला-बारूद हैंडलिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिक टर्रेट ड्राइव सिस्टम और ऑटोमैटिक फ्यूज सेटर शामिल हैं।
  • यह प्रति मिनट 9 से 10 राउंड तक फायर कर सकता है, जबकि पुराने मॉडलों में यह 6–8 राउंड प्रति मिनट थी।
  • ऑटोमेशन के कारण, K9 हॉवित्जर पर तैनात होने वाले क्रू सदस्यों की संख्या 5 से घटकर 3 रह गई है।
  • बेहतर हैंडलिंग, कम वाइब्रेशन और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में बेहतर प्रदर्शन के लिए इसे कम्पोजिट रबर ट्रैक्स से लैस किया जा सकता है।
  • इसे 2027 के आसपास ऑपरेशनल तैनाती के लिए तैयार किया जा रहा है।

भारत के पास पहले से K9 वज्र हॉवित्जर

भारतीय सेना पहले से ही 100 K9 वज्र गन चला रही है, जबकि दिसंबर 2024 में 100 और गन का ऑर्डर दिया गया था। ऐसे में 300 से अधिक नए K9 वज्र के ऑर्डर ने दक्षिण कोरिया के इस हथियार को चर्चा में ला दिया है। K9 वज्र-T एक मिनट में 6 से 8 राउंड फायर कर सकता है। इसमें मल्टीपल राउंड साइमलटेनियस इम्पैक्ट (MRSI) फीचर भी है, जिससे यह अलग-अलग प्रक्षेप पथ पर कई गोले दाग सकता है ताकि वे एक ही समय पर टारगेट पर लगें।

K9 वज्र क्या है?

K9 वज्र दक्षिण कोरिया के K9 थंडर का भारतीय वेरिएंट है। K9 थंडर एक 155एमएम, 52-कैलिबर का ट्रैक्ड सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर है। भारत में इसे लार्सन एंड टूब्रो (L&T) ने दक्षिण कोरिया के हनवा एयरोस्पेस के साथ पार्टनरशिप में बनाया है। इसे बनाने की फैक्ट्री गुजरात के हजीरा में स्थापित की गई। K9 वज्र तोप को लेकर भारत और दक्षिण कोरिया में एमओयू 25 मार्च 2012 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ली म्युंग-बाक की मौजूदगी में साइन हुए थे। इसके बाद 29 मार्च 2012 को DEFEXPO में सैमसंग टेकविन और लार्सन एंड टूब्रो ने भारत में K9 थंडर का उत्पादन करने के लिए अपनी साझेदारी की घोषणा की थी।

भारत ने K9 वज्र को क्यों चुना?

भारत ने भारत ने K9 वज्र की खरीद से पहले इसे भारतीय परिदृश्य में लंबे समय तक टेस्ट किया था। दक्षिण कोरिया ने अपने दो K9 थंडर भारत में फायरिंग और मोबिलिटी टेस्ट के लिए भेजे थे। उस समय भारतीय सेना K9 थंडर के अलावा रूसी 2S19 Msta-S को भी आजमा रही थी। भारतीय सेना ने K9 थंडर के एनबी राउंड सहित 587 भारतीय गोला-बारूद दागे और कुल 1,000 किमी की दूरी तय की। इसका मेंटीनेंस टेस्ट पुणे में, EMI टेस्ट चेन्नई में तकनीकी वातावरण टेस्ट बेंगलुरु में आयोजित किए गए। K9 थंडर ने भारतीय सेना के सभी निर्धारित पैरामीटर को पूरा किया, जबकि उसका प्रतिस्पर्धी रूसी 2S19 Msta-S ऐसा करने में नाकाम रहा।

भारत ने K9 वज्र-T में क्या बदलाव किए हैं?

  • K9 वज्र-T में 14 मुख्य भारतीय निर्मित सिस्टम हैं, जो मूल्य के हिसाब से 50% घटक हैं।
  • इसमें Nub गोला-बारूद सक्षम फायर कंट्रोल सिस्टम और इसका स्टोरेज, कम्यूनिकेशन सिस्टम और इन्वायरमेंट कंट्रोल और न्यूक्लियर, बॉयलोजिकल, केमिकल प्रोटेक्शन सिस्टम शामिल हैं।
  • सीधी फायरिंग क्षमता के लिए GPS (गनर की प्राइमरी साइट) और दक्षिण अफ्रीकी ऑक्सिलरी पावर यूनिट जैसे अतिरिक्त सिस्टम लगाए गए थे, जो रेगिस्तान में ऑपरेशन के लिए उपयुक्त हैं। बाद मे इसमें कोरियाई ऑक्सिलरी पावर यूनिट लगाया गया है।
  • K9 वज्र की डिजाइन को रेगिस्तान और उच्च तापमान की स्थिति में संचालन के लिए उपयुक्त बनाने के लिए अपग्रेड किया गया है।
  • यह ब्रस्ट मोड में 15 सेकेंड में 3 राउंड फायरिंग भी कर सकता है। इसके अलावा प्रति मिनट इसके फायरिंग करने की दर 6 से 8 राउंड है।

K9 वज्र-T भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण क्यों?

K9 वज्र-T को ऊंचे एंगल पर विस्फोटक गोले दागने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे यह पहाड़ियों, पहाड़ों और दीवारों जैसी रुकावटों के पीछे के टारगेट पर हमला करने में सक्षम है। K9 वज्र-T को आसानी से एक जगह से दूसरे जगह पर तैनात किया जा सकता है। यह दुश्मन पर हमला कर जवाबी हमले से पहले तुरंत अपना स्थान बदल सकता है। इसके अलावा इसमें शक्तिशाली आर्मर्ड प्रोटेक्शन सिस्टम भी लगाया गया है, जो न सिर्फ दुश्मन के हमलों को नाकाम कर सकता है, बल्कि अंदर मौजूद क्रू को भी सुरक्षित रखता है। इसका पूरी तरह से वेल्डेड स्टील का हल क्रू को शेल के टुकड़ों, लैंडमाइन और छोटे हथियारों की फायरिंग से बचाता है।