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नई दिल्‍ली: रूस अपनी ग्‍लोबल एनर्जी स्‍ट्रैटेजी में भारत को सबसे अहम पार्टनर के तौर पर देखता है। इसका साफ संकेत सामने आ गया है। भारत ‘रशियन एनर्जी वीक इंटरनेशनल फोरम’ का पहला ऑफिशियल पार्टनर देश बनेगा। अक्टूबर में मॉस्को में इस तीन दिन के इवेंट में भारत का तेल और गैस उद्योग अपने प्रोजेक्ट्स और निवेश के मौकों को दिखाएगा। ‘रशियन एनर्जी वीक (REW) मॉस्को में आयोजित होने वाला दुनिया के सबसे प्रमुख ग्‍लोबल एनर्जी फोरम में से एक है। भारत को इसका पहला ऑफिशियल पार्टनर कंट्री बनाना कई बड़े और व्यावहारिक संकेतों को दिखाता है।

भारत मॉस्को में 14 से 16 अक्टूबर तक होने वाले ‘रशियन एनर्जी वीक (REW) 2026’ में आधिकारिक पार्टनर देश के तौर पर शामिल होगा। यह भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग के विस्तार की दिशा में अहम कदम है।

8 भारतीय कंपनियां दिखाएंगी अपने प्रोजेक्‍ट्स

‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री’ (FIPI) इस इंटरनेशनल फोरम में भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करेगी। ‘मानेज सेंट्रल एग्जीबिशन हॉल’ और ‘गोस्तिनी द्वोर’ में भारत का एग्जीबिशन स्टॉल लगाया जाएगा, जहां भारत की आठ बड़ी तेल कंपनियों के प्रोजेक्ट्स दिखाए जाएंगे।

फोरम में 100 देश होंगे शामिल

‘रशियन एनर्जी वीक’ का आयोजन ‘रोसकांग्रेस फाउंडेशन’ करता है। इसे रूसी सरकार, रूस के ऊर्जा मंत्रालय और मॉस्को सरकार का सहयोग मिलता है। REW की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, 2026 के फोरम में 100 देशों और क्षेत्रों से लगभग 7,000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

भारत बेहद अहम एनर्जी पार्टनर

रूस के उप-प्रधानमंत्री और ‘रशियन एनर्जी वीक’ आयोजन समिति के चेयरमैन अलेक्जेंडर नोवाक ने कहा कि भारत रूस के लिए अहम ऊर्जा पार्टनर बना हुआ है। मॉस्को रूस के तेल और गैस सेक्टर में भारतीय निवेश को बढ़ाने में दिलचस्पी रखता है।

नोवाक ने कहा, ‘रूस अपने तेल और गैस सेक्टर में भारतीय निवेश और भारत में रूसी कंपनियों के साथ मिलकर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क विकसित करने में दिलचस्पी रखता है।’

उन्होंने कहा कि तेल और गैस प्रोजेक्ट्स में दोनों देशों के बीच सहयोग आगे बढ़ रहा है। REW 2026 एग्जीबिशन से भारत और रूस की ओर से मिलकर विकसित किए जा रहे मौजूदा और संभावित प्रोजेक्ट्स को पेश करने का मौका मिलेगा।

गहरे होते रिश्‍तों को दिखा रही पार्टनरशिप

यह पार्टनरशिप दोनों देशों के बीच गहरे होते ऊर्जा संबंधों के बीच हो रही है। हाल के वर्षों में रूस भारत के लिए कच्चे तेल का बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। वहीं, भारतीय कंपनियों ने भी रूस के ऊर्जा सेक्टर में निवेश और दिलचस्पी बनाए रखी है।

भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर फोकस

रूसी राष्ट्रपति के सलाहकार और ‘रशियन एनर्जी वीक’ आयोजन समिति के कार्यकारी सचिव एंटोन कोब्याकोव ने कहा कि भारत और रूस के बीच स्‍ट्रैटेजिक पार्टनरशिप खास तौर पर एनर्जी सेक्टर में साफ तौर पर दिखती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियां रूसी टेक्नोलॉजी और संसाधनों में दिलचस्पी दिखाती रही हैं। वहीं, ज्‍वाइंट प्रोजेक्ट्स आपसी फायदे वाले सहयोग की संभावना को दिखाते हैं।

कोब्याकोव ने इस रिश्ते के व्यापक बहुपक्षीय पहलू पर भी जोर दिया। उन्‍होंने कहा कि मॉस्को और नई दिल्ली ब्रिक्स (BRICS) और दूसरे इंटीग्रेशन ग्रुप्‍स में अपने रुख में तालमेल बिठाने के लिए काम कर रहे हैं।