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मुरादाबाद: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. एसटी हसन ने सड़कों पर नमाज पढ़ने और त्योहार मनाने को लेकर बड़ा बयान दिया है। सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर चल रही देशव्यापी सियासत के बीच डॉ. हसन ने साफ कहा कि कानून और नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए।

डॉ. हसन ने सवाल उठाया कि महज कुछ देर की नमाज पर ही आपत्ति क्यों जताई जाती है? हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सड़कें लोगों के आने-जाने के लिए होती हैं। पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश और खासकर मुरादाबाद में पिछले दो साल से सड़कों पर नमाज नहीं हो रही है। अब ईदगाह के अंदर ही अलग-अलग शिफ्ट में नमाज अदा कराई जा रही है। हिंदू भाइयों के वोट ध्रुवीकरण के लिए और अपनी पीठ थपथपाने के लिए इस तरह के बयान दिए जाते हैं।

‘सड़कों पर जगराते और लंगर भी होते हैं’

पूर्व सांसद हसन ने कहा कि सड़क पर सिर्फ नमाज पढ़ने से दिक्‍कत नहीं होती है। लोगों के कारोबार भी तो सड़कों पर हो रहे हैं। पंचर वाले से लेकर रिपेयर करने वाले से लेकर गरीब आदमी की दुकान का सामान सड़क पर पड़ा होता है। सबको हटाना भी मुनासिब नहीं होता है क्‍योंकि उनकी रोजी रोटी है। सड़कों के ऊपर और भी धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। जगराते होते हैं, लंगर होते हैं, सब काम होते हैं।

‘नमाज तो आधे घंटे में हो जाता है’

एसटी हसन ने कहा कि नमाज तो सिर्फ मुश्किल से आधे घंटे की बात है। कांवड़ यात्रा के लिए तो एक-एक महीने तक सड़कें बंद कर दी जाती हैं और राहगीरों को परेशानी होती है, इसमें कोई शक नहीं है। अगर कानून बने हैं तो सबके लिए बराबर बने हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक विशेष धर्म के लोगों के लिए कानून हो पर दूसरे के लिए उसका कोई मतलब ना हो।

सीएम योगी के बयान पर तेज हुई राजनीति

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने एक कार्यक्रम में कहा था कि यूपी में सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति बिल्‍कुल नहीं दी जाएगी। धर्मस्‍थल में ही नमाज पढ़ने की अनुमति है। अगर संख्‍या ज्‍यादा है तो शिफ्ट में नमाज पढ़वाया जाए। सीएम योगी के इस बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।