नई दिल्ली: समय के साथ बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। लोग भविष्य में किसी जरूरी काम और इमरजेंसी पड़ने पर पैसों की दिक्कतों को कम करने के लिए कई प्रकार की प्लानिंग करते हैं। वे इसके लिए बैंक, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड्स, सरकारी योजनाएं, बॉन्ड, गोल्ड आदि में निवेश करते हैं।
ऐसे फाइनेंशियल प्लानिंग में एक प्लानिंग होती है रिटायरमेंट प्लानिंग । एक्सपर्ट बताते हैं कि आप जितनी जल्दी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू कर देते हैं, समय के साथ आपको उतना ही अधिक फायदा होता है। इस बीच हम यहां केवल 20 साल की उम्र से ही रिटायरमेंट प्लानिंग की बात कर रहे हैं। शुरुआत हम रिटायरमेंट प्लानिंग के बारे में जानने से करेंगे।
रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब क्या है?
हमारे सहयोगी न्यूज पॉइंट के अनुसार, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसे बचाना ही नहीं है, बल्कि यह पक्का करना है कि जब आपकी नियमित कमाई बंद हो जाए, तब भी आपकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।
बढ़ती महंगाई, हेल्थकेयर के बढ़ते खर्च और बदलती लाइफस्टाइल की जरूरतों की वजह से रिटायरमेंट महंगा हो सकता है। अगर कोई बचत नहीं करता है, तो रिटायरमेंट के बाद भी जीवन का वही स्तर बनाए रखना बहुत मुश्किल हो सकता है।
एक्सपर्ट कहते हैं कि आप जितनी जल्दी रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करेंगे, उतना ही आसान बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाना होगा। निवेश में देरी करने का मतलब अक्सर यह होता है कि उन्हीं आर्थिक लक्ष्यों को पाने के लिए बाद में कहीं ज्यादा पैसे लगाने पड़ते हैं। रिटायरमेंट प्लानिंग जल्दी शुरू करने से आपको चक्रवृद्धि ब्याज का भी फायदा होता है। मतलब कि आपके निवेश किए गए पैसों पर जो ब्याज मिलता है एक समय बाद उस ब्याज के पैसे पर भी ब्याज मिलता है। इसको पावर ऑफ कंपाउंडिंग कहा जाता है।
20 साल की उम्र में रिटायरमेंट प्लानिंग
मान लीजिए अगर कोई व्यक्ति 20 साल की उम्र से हर महीने 5,000 रुपये का निवेश करता है और उसे सालाना औसतन 10% का रिटर्न मिलता है। 60 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते, उसका निवेश एक बड़ा रिटायरमेंट फंड बन सकता है।
अब इसकी तुलना ऐसे व्यक्ति से करें जो 35 साल की उम्र में वही मासिक निवेश शुरू करता है। निवेश बढ़ने के लिए 15 साल कम मिलने के कारण, उसे वैसा ही रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए हर महीने कहीं ज्यादा निवेश करना पड़ सकता है। इससे पता चलता है कि थोड़ी जल्दी शुरुआत करने से कितना बड़ा फाइनेंशियल फायदा हो सकता है।
छोटी-छोटी बचत भी बड़ी संपत्ति
जानकार बताते हैं कि अपनी निवेश यात्रा को जल्दी यानी कि कम उम्र में शुरू करने का मतलब है कि आपको हर महीने बड़ी रकम बचाने की जरूरत नहीं होती है। अगर सही समय दिया जाए, तो छोटी-छोटी बचत भी बड़ी संपत्ति बन सकती है।
कम उम्र में निवेश के फायदे क्या हैं?
- कम उम्र में निवेश के कई फायदे मिलते हैं। इससे आपको फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है, भविष्य की आर्थिक चिंता कम होती है और जल्दी रिटायर होने की संभावना बढ़ जाती है।
- बाद में पिछड़ने की चिंता करने के बजाय, जल्दी निवेश करने वाले लोग वर्तमान का आनंद लेते हुए अपनी संपत्ति को धीरे-धीरे बढ़ाने पर ध्यान दे सकते हैं।
- जल्दी रिटायर होना सिर्फ एक सपना नहीं है; लगातार निवेश और लंबी अवधि की प्लानिंग से इसे सच किया जा सकता है। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, आपके पैसे को कंपाउंडिंग के ज़रिए बढ़ने के लिए उतना ही ज्यादा समय मिलेगा।
- 20s (20 साल की उम्र में) में किया गया छोटा-सा मासिक निवेश भी एक मजबूत आर्थिक आधार बना सकता है और भविष्य में आरामदायक व तनाव-मुक्त रिटायरमेंट का आनंद लेने में आपकी मदद कर सकता है।
- रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है?
रिटायरमेंट प्लानिंग वह है, जिसमें आप अपनी रिटायरमेंट वाली जिंदगी के लिए काफी पहले से प्लान करके फंड या पैसे जुटाते हैं। इससे आप यह पक्का करते हैं कि जब आपकी नियमित कमाई बंद हो जाए, तब भी आपकी आर्थिक सुरक्षा बनी रहे। - रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए किन बातों पर ध्यान दें?
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए आय का वैकल्पिक साधन बनाना, रिटायरमेंट बचत में हर साल योगदान बढ़ाना, केवल सुरक्षा योजनाओं पर ही निर्भर न रहना, बड़ी राशि निवेश करने से पहले जोखिम कारकों को ध्यान में रखना और महंगाई पर विचार करना आदि है। - रिटायरमेंट प्लानिंग की गलतियां क्या हैं?
रिटायरमेंट प्लानिंग की गलतियां महंगाई का अनुमान ना लगा पाना, देर से शुरुआत करना, पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई ना करना समेत अन्य हैं। - रिटायरमेंट के लिए सबसे अच्छा प्लान कौन सा है?
रिटायरमेंट के लिए सबसे अच्छे प्लान में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) समेत अन्य माने जाते हैं। - एम्पलाई प्रोविडेंट फंड की ब्याज दर कितनी है?
एम्पलाई प्रोविडेंट फंड की ब्याज दर 8.25 फीसदी सालाना है।



