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भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल ने मुलाकात की। इस दौरान मध्य प्रदेश में राज्य सभा चुनाव को लेकर चर्चा हुई, खासकर तीसरी सीट पर चुनाव लड़ा जाए या नहीं लड़ा जाए इसे लेकर भी बात हुई।

सूत्रों के अनुसार पार्टी ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है लेकिन यदि समर्थन के प्रति पार्टी आश्वस्त हो गई तो उस स्थिति में कैलाश विजयवर्गीय को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। भाजपा ने इससे पहले राज्यसभा की दो सीटों पर 15 नेताओं के नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है।

प्रदेश में तीन सीटें रिक्त

बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें रिक्त हो रही हैं। भाजपा से केंद्रीय मंत्री जार्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का जून में कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वहीं कांग्रेस से दिग्विजय सिंह भी रिटायर हो रहे हैं। तीसरी सीट छीनने के लिए भाजपा प्रयासरत है।

अरविंद भदौरिया के नाम पर विचार कर रही भाजपा

फिलहाल सवर्ण वर्ग से अरविंद भदौरिया और मछुआ समुदाय से किसी को राज्यसभा में भेजने पर विचार किया जा रहा है। भाजपा अनुसूचित जाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य, विनोद गोटिया सहित कई नाम पार्टी ने केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं।

राज्यसभा चुनाव का गणित और भाजपा की रणनीति

मध्य प्रदेश में 18 जून को होने जा रहे राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव का गणित पूरी तरह से विधायकों की संख्या बल (नंबर गेम) पर आधारित है। वर्तमान स्थिति के अनुसार, इन तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के 58 विधायकों के वोटों की जरूरत है। अभी प्रदेश में 229 विधायक हैं।

कांग्रेस का संकट

कांग्रेस की निर्मला सप्रे दल बदल के आरोपों से घिरी हैं और मुकेश मल्होत्रा को मत देने का अधिकार नहीं है। ऐसे में कांग्रेस के पास 64 में से दो वोट कम हो सकते हैं। शेष कुछ विधायकों की निष्ठा भी संदेहास्पद है। भाजपा इसी का फायदा उठा कर तीसरी सीट छीनना चाहती है, लेकिन वह कांग्रेस प्रत्याशी का नाम देखकर आगे बढ़ने की तैयारी में है।
भाजपा के पास दो सीट के बाद 48 एमएलए बचते हैं। सीट जीतने के लिए उसे आठ एमएलए की आवश्यकता है। चार तो भाजपा के संपर्क में हैं और कुछ आदिवासी विधायक भी उसके संपर्क में हैं।