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इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि पर भारत की रोक से तड़प रहे पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सामने गुहार लगाई है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशार डार ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत से आने वाली नदियों के बहाव को बदलने की भारत की कोशिशों पर ध्यान देने की अपील की गई है। डार ने चिनाब नदी पर बन रही भारत की दो परियोजनाओं को जिक्र किया है और इसे पाकिस्तान की जल, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 65 साल से चली आ रही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत नदियों के बहाव में हस्तक्षेप कर रहा है, जिससे पाकिस्तानी हिस्से में पानी कम मात्र में पहुंच रहा है। पाकिस्तान में कृषि प्रमुख रूप से भारत से जाने वाली नदियों के पानी पर निर्भर है।

UNSC के सामने भारत के खिलाफ गुहार

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत इफ्तिखार अहमद ने बताया कि उन्होंने डार का एक पत्र UNSC की अध्यक्ष और संयुक्त राष्ट्र में कोलंबिया की स्थायी प्रतिनिधि लियोनोर जलाबाटा टोरेस को सौंपा है। इसमें सिंधु जल संधि के उल्लंघन को लेकर चिंता जताई गई है।

अहमद ने कहा कि यह पत्र सुरक्षा परिषद का ध्यान चिनाब नदी पर भारत की परियोजनाओं की ओर आकर्षित करता है। पाकिस्तानी राजनयिक ने भारत की परियोजनाओं को अवैध बताया, जिनका मकसद पानी का रास्ता बदलना है। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं पश्चिमी नदियों के बहाव और उनके उपयोग को अवैध रूप से बदलने के भारत के इरादे को जाहिर करती हैं।

भारत पर पानी को हथियार बनाने का आरोप

पाकिस्तानी राजदूत ने भारत पर इन परियोजनाओं के जरिए पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद से आग्रह किया गया है कि वह इस नाजुक और बिगड़ती स्थिति का संज्ञान ले और भारत को उसके खुलेआम उल्लंघन के लिए जवाबदेह ठहराए।

डार ने भारत की हाइड्रो हेजेमनी पर जताई चिंता

सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले को लेकर पाकिस्तान दुनिया भर में रोना रो रहा है। एक दिन पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने ब्रसेल्स में एक सम्मेलन के दौरान भारत पर हाइड्रो-हेजेमनी (जल प्रभुत्व) की रणनीति अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि भारत कम से कम 17 ऐसी परियोजनाएं बना रहा है, जिनका मकसद सिंधु नदी प्रणाली को बड़े पैमाने पर बदलना है।