रियाद: पाकिस्तान उलेमा काउंसिल के हेड हाफिज मोहम्मद ताहिर अशरफी ने कहा है कि यमन के हूती मुस्लमान नहीं है। सऊदी अरब में एक कॉन्फ्रेंस में अशरफी ने ये बयान दिया है। ऐसा कहने के पीछे उन्होंने हूतियों के सऊदी अरब से टकराव को वजह बताया है। अशरफी का तर्क है कि जो सऊदी अरब का विरोध करता है, वह इस्लाम और मुसलमानों का दुश्मन है। ऐसे में हूतियों का इस्लाम से कोई लेना-देना नहीं है। अशरफी हाल ही में लंदन में एक पुरस्कार मिलने पर चर्चा में आए थे। बाद में संस्था ने उनसे ये पुरस्कार वापस ले लिया गया क्योंकि उनका लादेन की तारीफ में एक वीडियो सामने आया था।
पाकिस्तानी धर्मगुरू अशरफी का बयान ऐसे समय आया है, जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों में तीखा टकराव चल रहा है। सऊदी अरब ने यमन में हूतियों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए हैं। वहीं हूतियों की ओर से ड्रोन और मिसाइलों से सऊदी अरब को निशाना बनाया गया है। खासतौर से यमन में हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकार से कई इलाके छीन लिए हैं।
सऊदी के समर्थन में सुन्नी धर्मगुरु!
जंग के मैदान में हूतियों से पिछड़ रही सऊदी अरब की सरकार धर्मगुरुओं के सहारे यमनी गुट के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करती दिख रही है। सऊदी के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान ने हाल ही में देश के सैनिकों से कहा है कि वे ईरान समर्थित हूतियों को सत्ता से बेदखल करने की लड़ाई में जान देने के लिए तैयार रहें। उन्होंने बयान में कुरान की आयतों का जिक्र किया है।
यमन का पड़ोसी देश सऊदी अरब लंबे समय से हूतियों का विरोध करता है, जिनको ईरान का समर्थन है। सऊदी ने यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन किया है। इस टकराव ने इसलिए ध्यान खींचा है क्योंकि सऊदी अरब सुन्नी देश है जबकि हूती शिया इस्लाम को मानते हैं। ऐसे में इस लड़ाई को इन दो फिरकों से भी जोड़ा जा रहा है।
हती कौन हैं?
हूती उत्तरी यमन का एक सशस्त्र राजनीतिक समूह है, जो इस्लाम के शिया फिरके के जैदी समुदाय से आते हैं। हूती खुद को इजराल-अमेरिका के खिलाफ ईरान के नेतृत्व वाले ‘प्रतिरोध के ध्रुव’ का हिस्सा मानते हैं। यह गुट फिलिस्तीन, लेबनान, यमन, ईरान, इराक और इलाके के दूसरे देशों में इजरायल और अमेरिका से दखल का विरोध करता है।
हूती (असली नाम अंसार अल्लाह) समूह यमन में 1990 के दशक में बना और तेजी से मजबूत हुआ। इसकसे संस्थापक हुसैन अल-हूती के नाम पर इनको जाना जाता है। 2000 के दशक की शुरुआत में हूतियों ने यमनी राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के खिलाफ विद्रोह कर दुनिया का ध्यान खींचा था। साल 2011 में समूह ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया।
हूती चीफ का पैगंबर से कनेक्शन!
अंसार अल्लाह के नेता अब्दुल मलिक अल-हती हैं, जो 2004 से गुट की कमान संभाल रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि जिन हूतियों को पाकिस्तानी धर्मगुरू ‘इस्लाम से बाहर’ बता रहे हैं, उनके नेता अब्दुल मलिक अल-हूती खुद को पैगंबर का वंशज कहा जाता हैं। अब्दुल मलिक जिस जैदी शिया परंपरा से जुड़े हैं, उसका संबंध हजरत इमाम हुसैन के पोते जैद इब्न अली से जुड़ता है। जैद के पिता इमाम हुसैन पैगंबर मोहम्मद की बेटी फातिमा के बेटे थे और पैगंबर के बहुत चहेते थे।



