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भोपाल। प्रदेश में अब खुले सेप्टिक टैंक या बोरवेल से हादसे हुए तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन से लेकर बर्खास्त तक करने की कार्रवाई की जाएगी। ओंकारेश्वर की घटना के बाद मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। ऐसी दुर्घटनाओं पर जवाबदेही तय कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संबंधित प्रकरण की विभागीय जांच की जाएगी।

दुर्घटना में लापरवाही करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित किया जाएगा। अगर विभागीय जांच में दोषी पाया जाता है तो संबंधित के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाएगी। ओंकारेश्वर के पहले भी प्रदेश में खुले और असुरक्षित सेप्टिक टैंकों के कारण कई हादसे हुए हैं। पिछले माह जून में ही बैतूल जिले के मुलताई में और जबलपुर में अक्टूबर 2025 में दो सगे भाइयों की मौत हो गई थी।

प्रदेश के अन्य शहरों में भी ऐसी ही कई घटनाएं हुई हैं। राज्य शासन द्वारा सेप्टिक टैंक और बोरवेल खुले न छोड़े जाने की सख्त हिदायत है। कार्रवाई के लिए शासन ने गाइडलाइन भी बनाई है, लेकिन सख्ती न होने से बार-बार हो रही ऐसी लापरवाही आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

सेप्टिक टैंक में गिरने की हालिया घटनाएं

ओंकारेश्वर (25 जुलाई 2026): ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में एक खुले सेप्टिक टैंक में गिरने से नागपुर के तीन वर्षीय मासूम बच्चे (तनुष) की मौत हो गई। इस मामले में नगर परिषद ने ही अतिक्रमण हटाने के दौरान सेप्टिक टैंक खुला छोड़ दिया था, जिससे नागपुर के बच्चे के गिरने का हादसा हो गया।

जबलपुर (26 अक्टूबर 2025): अस्पताल परिसर में बने एक खुले सेप्टिक टैंक में खेलते समय गिर जाने से दो सगे भाइयों (मासूम बच्चों) की डूबने से मौत हो गई थी।

बैतूल (10 जून 2026): बुधवार की शाम को मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई थाना क्षेत्र के अंतर्गत परमंडल (भगत सिंह वार्ड) में हुई थी. इस हादसे में डिवटिया गांव के निवासी दो सगे भाइयों, संजय पंवार और विजय पंवार की सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग निकालते समय जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौत हो गई थी।